अमेरिकी प्रस्ताव ने बढ़ाई छात्रों की टेंशन
अमेरिका में उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय समेत हजारों विदेशी छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के तहत OPT का लाभ लेने वालों पर 1 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपये) तक की फीस लगाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।
क्या है OPT और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
OPT यानी ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से F-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्र डिग्री पूरी होने के बाद वहीं काम करने का अवसर प्राप्त करते हैं। मौजूदा नियमों के अनुसार सामान्य कोर्स के छात्रों को 12 महीने तक, जबकि STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) से जुड़े छात्रों को अधिकतम 36 महीने तक काम करने की अनुमति मिलती है। यही अनुभव आगे चलकर H-1B वर्क वीजा और अमेरिका में स्थायी करियर बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
प्रस्ताव लागू हुआ तो बढ़ सकता है आर्थिक बोझ
यदि प्रस्तावित फीस लागू होती है, तो यह विदेशी छात्रों के लिए अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक बोझ साबित हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह राशि छात्रों को चुकानी होगी या उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियों को। यदि कंपनियों पर यह जिम्मेदारी आती है, तो वे अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता दे सकती हैं। वहीं अगर फीस छात्रों को देनी पड़ी, तो कई प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक कारणों से अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।
भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है बड़ा असर
हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा और बेहतर करियर की उम्मीद में अमेरिका का रुख करते हैं। ऐसे में OPT से जुड़े नियमों में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो विदेश में पढ़ाई की लागत पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगी और छात्रों को अपने करियर की योजना नए सिरे से बनानी पड़ सकती है।
फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार
अभी तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में छात्र और शैक्षणिक संस्थान आगे आने वाली आधिकारिक जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। यदि भविष्य में इस संबंध में कोई नया नियम लागू होता है, तो उसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसका वास्तविक प्रभाव छात्रों और कंपनियों पर किस प्रकार पड़ेगा।










