रिटायरमेंट के बाद कई वरिष्ठ नागरिकों के सामने यह सवाल रहता है कि अगर उनके पास नियमित नौकरी या कारोबार से होने वाली आय नहीं है, तो क्या उन्हें हर साल इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करना जरूरी है? खासकर जिन लोगों की आमदनी पेंशन और बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज से होती है, उनके लिए टैक्स नियमों को समझना जरूरी है। कुछ पात्र वरिष्ठ नागरिकों को आयकर कानून की धारा 194P के तहत ITR दाखिल करने से राहत मिल सकती है, लेकिन इसके लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
75 साल या उससे अधिक उम्र वालों को कब मिलती है ITR से राहत?
धारा 194P के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कुछ निवासी वरिष्ठ नागरिकों को ITR दाखिल करने से छूट दी गई है। यह सुविधा हर 75+ व्यक्ति के लिए अपने आप लागू नहीं होती। वरिष्ठ नागरिक भारत का निवासी होना चाहिए और उसकी आय केवल पेंशन तथा उसी बैंक से मिलने वाले ब्याज तक सीमित होनी चाहिए, जहां से उसे पेंशन प्राप्त होती है। इसके अलावा संबंधित बैंक को आवश्यक घोषणा देना भी जरूरी है।
ऐसे मामले में निर्दिष्ट बैंक वरिष्ठ नागरिक की कुल आय की गणना करता है। लागू कटौतियों और धारा 87A की रिबेट को ध्यान में रखने के बाद बैंक नियमों के अनुसार टैक्स की गणना और TDS करता है। यदि धारा 194P के तहत टैक्स काटा गया है, तो संबंधित वर्ष के लिए वरिष्ठ नागरिक को सामान्य तौर पर अलग से ITR दाखिल करने की जरूरत नहीं रहती।
किन लोगों को ITR दाखिल करना पड़ सकता है?
अगर वरिष्ठ नागरिक की आय केवल पेंशन और उसी बैंक के ब्याज तक सीमित नहीं है, तो धारा 194P की यह विशेष छूट लागू नहीं होगी। उदाहरण के तौर पर किसी अन्य बैंक से मिलने वाला ब्याज या दूसरी तरह की आय होने पर मामले की अलग से जांच करनी पड़ सकती है। इसी तरह 75 वर्ष से कम उम्र के वरिष्ठ नागरिकों पर यह विशेष ITR छूट लागू नहीं होती।
इसलिए केवल यह मान लेना सही नहीं है कि रिटायरमेंट के बाद नौकरी की आय बंद हो गई है तो ITR की जरूरत भी खत्म हो गई। हर व्यक्ति की उम्र, निवास स्थिति और आय के स्रोत के आधार पर नियम अलग हो सकते हैं।
TDS कटने का मतलब हमेशा ITR की जरूरत खत्म होना नहीं
सीनियर सिटिजन्स को बैंक ब्याज पर TDS कटता दिखाई दे सकता है, लेकिन सिर्फ TDS कट जाने से हर मामले में ITR से छूट नहीं मिलती। धारा 194P के तहत मिलने वाली विशेष राहत के लिए ऊपर बताई गई सभी शर्तों का पूरा होना जरूरी है। पात्र वरिष्ठ नागरिक के मामले में निर्दिष्ट बैंक ही आय की गणना करके आवश्यक TDS की प्रक्रिया पूरी करता है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक जमा पर ब्याज से जुड़ी कुछ अलग टैक्स राहत भी मौजूद है। आयकर विभाग के अनुसार, धारा 80TTB के तहत पात्र वरिष्ठ नागरिक बैंक, पोस्ट ऑफिस या सहकारी बैंक में जमा पर मिलने वाले ब्याज पर निर्धारित सीमा तक deduction का लाभ ले सकते हैं।
निष्कर्ष: अगर कोई वरिष्ठ नागरिक 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र का है, भारत का निवासी है और उसकी आय केवल पेंशन तथा उसी बैंक से मिलने वाले ब्याज से आती है, तो धारा 194P के तहत ITR दाखिल करने से राहत मिल सकती है। लेकिन इसके लिए बैंक को आवश्यक घोषणा देना और बाकी सभी शर्तें पूरी करना जरूरी है। दूसरी तरह की आय होने पर ITR की जरूरत हो सकती है, इसलिए अपनी आय के सभी स्रोतों को देखकर ही फैसला लेना चाहिए।










