Crude Oil Price Today: कच्चे तेल में लगातार तीसरे दिन उछाल, 91 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट; अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता

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Crude Oil Rate Update: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी दिन तेजी दर्ज की गई है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। यह जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI भी करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। तेल की कीमतों में इस तेजी ने वैश्विक बाजार में एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव का असर

कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है। बाजार की नजर दोनों देशों के बीच संभावित समझौते पर बनी हुई है, लेकिन फिलहाल हालात से जल्द किसी नए समझौते की उम्मीद स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से भी ईरान के साथ किसी समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं करने के संकेत दिए गए हैं। ऐसे में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण तेल बाजार में दबाव बढ़ा है।

ब्रेंट क्रूड जुलाई के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर

ब्रेंट क्रूड का 91 डॉलर के पार पहुंचना बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे पहले जुलाई के बाद इस स्तर तक कीमत नहीं पहुंची थी। लगातार तीसरे दिन बढ़त से संकेत मिल रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की नजर अब अमेरिका-ईरान संबंधों और आगे होने वाले घटनाक्रमों पर बनी हुई है। दूसरी ओर WTI करीब 85 डॉलर के स्तर पर बना हुआ है।

भारत पर क्यों पड़ सकता है असर?

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, आपके दिए स्रोत में मौजूदा तेजी का भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई निश्चित तत्काल प्रभाव नहीं बताया गया है। घरेलू ईंधन कीमतों पर असर कई अन्य कारकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्रूड की कीमत, मुद्रा विनिमय दर और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर निर्भर करता है। इसलिए केवल ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर पार जाने के आधार पर घरेलू कीमतों में तत्काल बदलाव का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

आगे बाजार की नजर किन बातों पर रहेगी?

आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है। यदि तनाव बढ़ता है तो बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जबकि किसी सकारात्मक समझौते के संकेत मिलने पर कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल लगातार तीसरे दिन की तेजी के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में आगे के घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

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