भोपाल के बैरागढ़ चीचली इलाके में देर रात फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया। पुलिस के अनुसार जिलाबदर किए गए बदमाश जीतू यादव पर अजय बैरागी के घर और कार की ओर गोली चलाने का आरोप है। घटना रात करीब तीन बजे की बताई जा रही है। परिवार के लोगों ने आवाज सुनकर घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
FIR दर्ज होने में देरी बनी कार्रवाई की वजह
फायरिंग जैसी गंभीर घटना की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की। शिकायतकर्ता की रिपोर्ट करीब आठ घंटे बाद सुबह लगभग 11:30 बजे दर्ज की गई। इसी दौरान आरोपितों के मौके से निकल जाने की बात सामने आई। मामले में कार्रवाई में देरी को पुलिस अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही माना है।
प्रारंभिक जांच के आधार पर डीसीपी जोन-4 आदर्शकांत शुक्ला ने कजलीखेड़ा थाने की थाना प्रभारी पल्लवी पांडे और रात्रि ड्यूटी पर तैनात एसआई महेश मांझी को लाइन अटैच कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक फायरिंग जैसे संवेदनशील मामले में शिकायत मिलने के बाद तेजी से कानूनी कार्रवाई और आरोपितों की तलाश जरूरी थी।
पुरानी रंजिश से जुड़ा बताया जा रहा मामला
शिकायत के मुताबिक घटना के समय अजय बैरागी के परिवार के लोग घर में मौजूद थे। रात में बाहर से वाहन का कांच टूटने जैसी आवाज सुनाई देने के बाद परिवार को फायरिंग की जानकारी हुई। अजय के बाहर आने पर कुछ लोगों द्वारा घर और कार की दिशा में गोली चलाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में जीतू यादव का नाम भी सामने आया है। घटना के बाद आरोपितों के वहां से चले जाने की बात कही गई है।
पुलिस जांच में दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद होने की जानकारी सामने आई है। करीब छह महीने पहले कोलार के बांसखेड़ी क्षेत्र में भी दोनों गुटों के बीच विवाद और फायरिंग की घटना हुई थी। उस मामले में कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। पुलिस अब ताजा घटना को पुरानी रंजिश और क्षेत्रीय वर्चस्व के विवाद से जोड़कर भी जांच कर रही है।
जिला बदर होने के बावजूद भोपाल में मौजूदगी पर सवाल
मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि जिस जीतू यादव को करीब दो महीने पहले कोलार थाना क्षेत्र से जिला बदर किया गया था, वह प्रतिबंध के बावजूद भोपाल में कैसे पहुंचा। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। ताजा घटना के बाद जिला बदर आरोपितों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस अब आरोपितों की तलाश के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के समय वहां कौन-कौन लोग मौजूद थे और फायरिंग के पीछे वास्तविक वजह क्या थी। साथ ही पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि जिला बदर आदेश के बावजूद आरोपित की शहर में मौजूदगी की जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं मिली।
घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच आगे बढ़ा दी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपितों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।










