जबलपुर बनेगा युद्धक टैंकों की नई ताकत, 450 करोड़ की परियोजना से टी-72 को मिलेगा नया जीवन; रक्षा उत्पादन में महाकोशल की बढ़ेगी भूमिका

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जबलपुर के लिए रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ा अवसर सामने आया है। वाहन निर्माणी जबलपुर (VFJ) में अब केवल सैन्य वाहनों का निर्माण ही नहीं, बल्कि युद्धक टैंकों की आधुनिक ओवरहालिंग और उन्हें दोबारा ऑपरेशनल स्थिति में तैयार करने की दिशा में भी काम शुरू होने जा रहा है। करीब 450 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना से शहर की रक्षा औद्योगिक पहचान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

टी-72 टैंकों की ओवरहालिंग से होगी शुरुआत

परियोजना के शुरुआती चरण में टी-72 टैंकों को आधुनिक सुविधाओं के जरिए ओवरहाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य पुराने हो चुके टैंकों की तकनीकी जांच, मरम्मत और जरूरी अपग्रेड के बाद उन्हें दोबारा सैन्य उपयोग के लिए तैयार करना है। पहले चरण में हर साल करीब 12 टी-72 टैंकों को ओवरहाल करने का लक्ष्य रखा गया है। आगे चलकर टी-90 टैंकों को भी इस व्यवस्था में शामिल करने की तैयारी है।

वीएफजे ने पहले परीक्षण के तौर पर मिले टैंकों की मरम्मत और ओवरहालिंग का काम किया था। सेना द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के बाद निर्माणी ने अपनी तकनीकी क्षमता प्रदर्शित की। इसी अनुभव के आधार पर जबलपुर को टैंक ओवरहालिंग से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी मिलने का रास्ता तैयार हुआ है।

450 करोड़ से बनेगा आधुनिक एमआरओ परिसर

प्रस्तावित परियोजना के तहत करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक एमआरओ यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहालिंग ढांचा विकसित किया जाएगा। इसमें टैंकों की तकनीकी जांच और परीक्षण के लिए आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक समेत जरूरी सुविधाएं तैयार की जाएंगी। इससे टैंकों की मरम्मत और परीक्षण की प्रक्रिया को एक ही स्थान पर अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकेगा।

इस परियोजना का असर केवल रक्षा उत्पादन तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। बड़े स्तर पर तकनीकी काम शुरू होने से स्थानीय स्तर पर कुशल कर्मचारियों की जरूरत बढ़ सकती है और इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है। साथ ही रक्षा क्षेत्र से जुड़े निवेश और तकनीकी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

अवाडी के बाद जबलपुर की बढ़ती जिम्मेदारी

अब तक टी-72 टैंकों की ओवरहालिंग में तमिलनाडु के अवाडी स्थित हैवी व्हीकल फैक्ट्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में जबलपुर में यह क्षमता विकसित होना देश के रक्षा उत्पादन नेटवर्क के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे सैन्य वाहनों और टैंकों से जुड़े काम को अलग-अलग केंद्रों में बांटकर उत्पादन और रखरखाव की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

वाहन निर्माणी जबलपुर पहले से ही सेना और विभिन्न सुरक्षा बलों के लिए कई प्रकार के सैन्य वाहन तैयार करती रही है। स्टालियन ट्रक, एलपीटीए ट्रक, वाटर वाउजर और सुरंगरोधी वाहनों जैसे रक्षा उपयोगी वाहनों के निर्माण के अनुभव के बाद अब निर्माणी युद्धक टैंकों से जुड़े काम में भी अपनी भूमिका बढ़ाने जा रही है।

रक्षा उत्पादन में महाकोशल को मिलेगी नई पहचान

जबलपुर में टैंक ओवरहालिंग की सुविधा विकसित होने से महाकोशल क्षेत्र की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता से लैस यह परियोजना भविष्य में क्षेत्र में रक्षा उद्योग से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए भी आधार तैयार कर सकती है।

परियोजना की आधारशिला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा रखे जाने का कार्यक्रम है। इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित रक्षा उत्पादन क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और वीएफजे के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहेंगे। परियोजना के पूरा होने के बाद जबलपुर देश के उन प्रमुख केंद्रों में शामिल हो सकता है जहां युद्धक टैंकों के रखरखाव और उन्हें दोबारा युद्ध के लिए तैयार करने की क्षमता उपलब्ध होगी।

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