सिंहस्थ 2028 की तैयारी में बड़ा प्लान: नर्मदा घाटों की सफाई और विकास की जिम्मेदारी संभालेंगे 16 जिलों के विधायक, विधायक निधि से होगा खर्च

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उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण नर्मदा नदी के घाटों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार एक नई कार्ययोजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत अब घाटों की सफाई और विकास की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों के बजाय संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों को सौंपी जा सकती है।

बताया जा रहा है कि इस योजना के माध्यम से नर्मदा नदी के किनारे स्थित प्रमुख घाटों का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए विधायक अपनी विधायक निधि का उपयोग कर सकेंगे। योजना में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष, दोनों के विधायकों की भागीदारी रहने की संभावना है।

16 जिलों में लागू हो सकती है ‘विधायक आदर्श घाट योजना’

नर्मदा नदी के उद्गम क्षेत्र अमरकंटक से लेकर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से अलीराजपुर तक फैले नदी तटों को इस योजना में शामिल करने की तैयारी है। मध्य प्रदेश के करीब 16 जिलों में स्थित प्रमुख नर्मदा घाटों का चयन कर उन्हें आदर्श धार्मिक और पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।

प्रस्तावित योजना को ‘विधायक आदर्श घाट योजना’ नाम दिया जा सकता है। इसके तहत प्रत्येक विधायक अपने क्षेत्र में आने वाले नर्मदा घाटों की सफाई, रखरखाव और सौंदर्यीकरण के लिए जिम्मेदारी निभाएंगे। घाटों के विकास कार्यों में विधायक निधि से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इस परियोजना में नर्मदा घाटी विकास विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मिलकर काम कर सकते हैं। अलग-अलग विभागों के समन्वय से घाटों के विकास और रखरखाव की व्यवस्था तैयार की जाएगी।

स्वच्छता के साथ धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

सरकार की योजना केवल घाटों की सफाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन्हें आधुनिक सुविधाओं से युक्त धार्मिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। घाटों के आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण किया जाएगा और जरूरत के अनुसार पार्क तथा सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

योग और ध्यान के लिए विशेष स्थान विकसित करने की भी योजना है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर वातावरण मिल सके। प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के साथ धार्मिक स्थलों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

नर्मदा तटों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए इन क्षेत्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सख्ती की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 से पहले प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और नदी तट क्षेत्रों को बेहतर स्वरूप देना है।

विधायक निधि से होगा घाटों का कायाकल्प

योजना की सबसे खास बात यह है कि घाटों के विकास और सफाई कार्यों के लिए संबंधित विधायकों की विधायक निधि का उपयोग किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने में आसानी होगी।

माना जा रहा है कि दीपावली के बाद इस योजना पर काम शुरू किया जा सकता है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सरकार धार्मिक पर्यटन, स्वच्छता और नदी संरक्षण को एक साथ जोड़कर बड़े स्तर पर तैयारी करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

संक्षिप्त हाइलाइट्स:

  • सिंहस्थ 2028 से पहले नर्मदा घाटों के विकास की तैयारी
  • मध्य प्रदेश के 16 जिलों के घाट हो सकते हैं योजना में शामिल
  • विधायकों को सौंपी जा सकती है सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी
  • विधायक निधि से होंगे विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य
  • घाटों पर पौधरोपण, योग केंद्र और अन्य सुविधाएं विकसित करने की योजना
  • सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती की तैयारी

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