भोपाल। राजधानी भोपाल के बड़े तालाब की सीमा, कैचमेंट क्षेत्र और संभावित अतिक्रमणों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए चल रहा विशेष सर्वे अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। चार दिनों तक चले ड्रोन और ग्राउंड ट्रुथिंग सर्वे के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने झील संरक्षण और आसपास हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। गौरा गांव क्षेत्र में तालाब के भीतर से गुजरती एक सीवेज लाइन दिखाई देने के बाद जांच टीम ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। वहीं भारत भवन के आसपास तालाब की निर्धारित सीमा के करीब पक्के निर्माण की स्थिति भी अधिकारियों के रिकॉर्ड में दर्ज की गई है।
एनजीटी के निर्देश पर गठित सात सदस्यीय विशेष टीम ने मुगलिया छाप से लेकर भारत भवन और तालाब के कई संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया। टीम ने ड्रोन सर्वे के साथ जमीन पर पहुंचकर जलभराव, पुरानी सीमाओं, निर्माण गतिविधियों और प्राकृतिक जलप्रवाह की स्थिति का अध्ययन किया। अब सर्वे के दौरान जुटाई गई जानकारी का राजस्व रिकॉर्ड, नक्शों और तकनीकी दस्तावेजों से मिलान किया जाएगा।
गौरा गांव में तालाब के भीतर दिखाई दी सीवेज लाइन
सर्वे के दौरान गौरा गांव क्षेत्र में बड़े तालाब के पानी और उसके आसपास के हिस्से से गुजर रही सीवेज लाइन सामने आई। इस स्थिति ने नगर निगम और झील संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच टीम अब यह पता लगाएगी कि यह लाइन कब बिछाई गई, इसका उद्देश्य क्या है और क्या इससे तालाब के पानी या पर्यावरण पर किसी प्रकार का प्रभाव पड़ रहा है। तकनीकी जांच के बाद ही इसकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
भारत भवन क्षेत्र में निर्माण की भी होगी जांच
भारत भवन के नजदीकी इलाके में तालाब की सीमा से लगभग 50 मीटर के दायरे में पक्का निर्माण होने की जानकारी भी सर्वे टीम के सामने आई है। टीम ने मौके की स्थिति को रिकॉर्ड किया है और अब निर्माण से संबंधित दस्तावेजों, नक्शों और अनुमतियों की जांच की जाएगी। यदि निर्माण निर्धारित पर्यावरणीय या राजस्व नियमों के विपरीत पाया गया तो आगे की कार्रवाई की संभावना बन सकती है।
सर्वे के दौरान सेंट्रल पार्क कॉलोनी में भी टीम ने तालाब की पुरानी सीमा का निरीक्षण किया। यहां सीमा को दर्शाने वाले मुनारों से आगे तक पानी फैला हुआ मिला। कुछ स्थानों पर करीब 15 फीट आगे तक जलभराव दिखाई दिया। टीम ने कॉलोनी के भीतर बने निजी निर्माणों और अन्य संरचनाओं की स्थिति को भी नोट किया।
कई इलाकों में पहुंची विशेष सर्वे टीम
चार दिनों के अभियान में बिशनखेड़ी रोड, मयंक नर्सरी, गौरा गांव, सेवानिया गौंड, एसपीएस क्षेत्र, नाथू बरखेड़ा बॉर्डर पुलिया और नाथू बरखेड़ा रोड सहित कई स्थानों की जांच की गई। बिशनखेड़ी तालाब से लगे इलाके में बड़े निर्माण से पहले की जाने वाली डंपिंग गतिविधियों के संकेत भी मिले हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इस तरह की गतिविधियां प्राकृतिक जलनिकासी और जलप्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए इसकी अलग से तकनीकी जांच की जाएगी।
विशेष टीम ने बड़े तालाब का ड्रोन सर्वे लगभग पूरा कर लिया है। छोटे तालाब के एक शेष हिस्से का सर्वे किए जाने के बाद टीम कलियासोत और केरवा क्षेत्र की ओर बढ़ेगी। आगामी चरण में कलियासोत नदी के आसपास और केरवा डैम क्षेत्र में भी जमीन और ड्रोन के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
इस पूरे सर्वे में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्य प्रदेश वेटलैंड अथॉरिटी, वन विभाग, नगर निगम और राजस्व विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं। पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञ और याचिका पक्ष के प्रतिनिधि भी सर्वे टीम के साथ मौजूद रहे।
अब सबसे महत्वपूर्ण चरण सर्वे में जुटाए गए तथ्यों का आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान करना होगा। तालाब की वास्तविक सीमा, कैचमेंट क्षेत्र, जलभराव वाले स्थानों, निर्माण गतिविधियों और संभावित अतिक्रमणों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर बड़े तालाब और उसके आसपास के क्षेत्रों को लेकर आगे प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय हो सकती है।










