इंदौर में साइबर ठगों का बड़ा खेल: 8 महीने में 60 करोड़ से ज्यादा की ठगी, पुलिस ने 5.90 करोड़ रुपये पीड़ितों को लौटाए

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जनवरी से अगस्त तक हजारों शिकायतें, क्राइम ब्रांच की कार्रवाई से करोड़ों रुपये सुरक्षित

इंदौर। शहर में ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच इंदौर क्राइम ब्रांच के पास साइबर अपराध से जुड़ी करीब 7 हजार शिकायतें पहुंचीं। इन मामलों में ठगों ने लोगों से 60 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगने की कोशिश की। हालांकि, समय पर पुलिस को सूचना मिलने और बैंकिंग सिस्टम के जरिए रकम को रोकने की कार्रवाई से बड़ी संख्या में पीड़ितों को राहत मिली है। पुलिस के प्रयासों से 400 से अधिक मामलों में कुल करीब 5 करोड़ 90 लाख 46 हजार 685 रुपये की राशि सुरक्षित कराकर संबंधित लोगों तक वापस पहुंचाई गई।

अलग-अलग महीनों में इतनी रकम हुई वापस

क्राइम ब्रांच के आंकड़ों के मुताबिक साइबर ठगी की रकम वापस कराने का सिलसिला पूरे आठ महीनों में जारी रहा। जनवरी में करीब 36.46 लाख रुपये, फरवरी में 91.95 लाख, मार्च में 59.05 लाख, अप्रैल में 49.29 लाख, मई में 47.31 लाख और जून में 40.88 लाख रुपये पीड़ितों को वापस मिले। जुलाई में सबसे अधिक करीब 1.50 करोड़ रुपये और अगस्त में 1.14 करोड़ रुपये वापस कराए गए। इस तरह जनवरी से अगस्त तक कुल 5.90 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पीड़ितों के खातों तक पहुंचाई गई।

इसके अलावा करीब 200 अन्य मामलों में लगभग 1.20 करोड़ रुपये वापस कराने की कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। पुलिस ने इन मामलों में अदालत से आवश्यक आदेश प्राप्त कर संबंधित बैंकों को भेज दिए हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह रकम भी पीड़ितों के खातों में वापस आने की उम्मीद है।

हजारों बैंक खाते और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई

साइबर अपराधियों तक ठगी की रकम पहुंचने के बाद उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने से रोकने के लिए क्राइम ब्रांच ने 10 हजार से अधिक बैंक खातों पर कार्रवाई की है। इनमें कई खातों को फ्रीज या लियन कराया गया है। पुलिस ने साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे 80 से ज्यादा मोबाइल नंबरों और 15 से अधिक मोबाइल डिवाइस के IMEI नंबरों को भी ब्लॉक कराया है। इसके अलावा हैक किए गए 250 से ज्यादा फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट रिकवर कराए गए हैं। लोगों की पहचान, नाम या फोटो का गलत इस्तेमाल करके बनाए गए 350 से ज्यादा फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट भी ब्लॉक करवाए गए हैं।

ठगी के तरीके लगातार हो रहे हैं हाईटेक

साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। कई मामलों में सोशल मीडिया या इंटरनेट पर आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों से फर्जी APK अथवा एप डाउनलोड करवाया जाता है। मोबाइल में जरूरी परमिशन मिलने के बाद ठग डिवाइस की गतिविधियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। निवेश और टास्क फ्रॉड में भी पहले छोटे फायदे का लालच देकर लोगों का भरोसा जीता जाता है और बाद में बड़ी रकम लगाने के लिए दबाव बनाया जाता है। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन ट्रेडिंग, गेमिंग या वीडियो को लाइक-सब्सक्राइब करने जैसे ऑफर भी इसी तरह इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

साइबर ठगी के मामलों में फर्जी अधिकारी बनकर डराने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ मामलों में ठग खुद को पुलिस, कस्टम या केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और पीड़ित को किसी अपराध में फंसने का डर दिखाते हैं। वहीं AI की मदद से आवाज और चेहरे की नकल कर परिचित व्यक्ति बनकर पैसे मांगने के मामले भी सामने आ रहे हैं। फर्जी लोन एप, KYC अपडेट, पैन कार्ड लिंक, क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, रिवार्ड प्वाइंट और बिजली बिल अपडेट जैसे बहानों से भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है।

ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत

क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होने पर घबराने के बजाय तुरंत शिकायत करें। साइबर फ्रॉड की जानकारी जल्द से जल्द 1930 पर देने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ जाती है। इंदौर में साइबर अपराध से संबंधित शिकायत के लिए पुलिस की साइबर हेल्पलाइन 704912-4445 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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