इंदौर। शहर के मध्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शास्त्री ब्रिज को लेकर नई योजना सामने आई है। रीगल चौराहे से गांधी हॉल के बीच मौजूदा शास्त्री ब्रिज की जगह अब एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग तीन लेन वाले रेलवे ओवरब्रिज बनाए जाने की तैयारी है। खास बात यह है कि पहले नया ब्रिज मौजूदा शास्त्री ब्रिज के समानांतर बनाया जाएगा। इसके बाद पुराने ब्रिज को हटाकर उसकी जगह दूसरा नया ब्रिज तैयार किया जाएगा।
पहले समानांतर ब्रिज का होगा निर्माण
रेलवे और इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में तय किया गया है कि सिंहस्थ से पहले मौजूदा शास्त्री ब्रिज के साथ एक नया समानांतर रेलवे ओवरब्रिज तैयार किया जाए। प्रस्तावित ब्रिज रीगल की तरफ जज बंगलों के आसपास से शुरू होकर गांधी हॉल परिसर की ओर उतरेगा। नया ब्रिज बनने के बाद पुराने शास्त्री ब्रिज को हटाकर उसी स्थान पर दूसरा ब्रिज बनाया जाएगा। इस व्यवस्था से निर्माण के दौरान यातायात को पूरी तरह बंद करने की जरूरत कम होगी।
दोनों ब्रिज पर अलग-अलग दिशा में चलेगा ट्रैफिक
नई योजना के अनुसार दोनों रेलवे ओवरब्रिज तीन-तीन लेन के होंगे। पुराने शास्त्री ब्रिज की जगह बनने वाले नए ब्रिज की प्रस्तावित चौड़ाई करीब 10.3 मीटर रखी गई है, जबकि समानांतर बनने वाले ब्रिज की चौड़ाई लगभग 9 से 9.30 मीटर के बीच होगी। दोनों ब्रिज तैयार होने के बाद एक पुल का इस्तेमाल आने वाले और दूसरे का जाने वाले वाहनों के लिए किया जा सकेगा। दोनों पुलों पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ की व्यवस्था भी रखने की योजना है। पहले अलग फुटओवर ब्रिज बनाने की बात थी, लेकिन नई योजना में इसकी आवश्यकता नहीं रहेगी।
परियोजना पर करीब 175 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान
पहले रेलवे की योजना मौजूदा शास्त्री ब्रिज को हटाकर एक नया ब्रिज बनाने की थी, जिसके लिए करीब 120 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था। अब समानांतर ब्रिज भी बनाए जाने के कारण पूरी परियोजना की अनुमानित लागत बढ़कर करीब 175 करोड़ रुपये हो सकती है। इसमें समानांतर बनने वाले नए ब्रिज पर लगभग 50 से 55 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। दोनों पुलों के निर्माण के लिए राशि रेलवे की ओर से आईडीए को उपलब्ध कराई जाएगी।
रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा काम
समानांतर ब्रिज के निर्माण की नई योजना को लागू करने के लिए रेलवे बोर्ड से मंजूरी लेना जरूरी होगा। अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया में लगभग दो से तीन महीने लग सकते हैं। रेलवे द्वारा दोनों पुलों के रेलवे ट्रैक वाले हिस्से के निर्माण कार्य की निगरानी की जाएगी, जबकि मुख्य निर्माण की जिम्मेदारी आईडीए को दी जा रही है।
सर्वे के बाद तय होगा ब्रिज का अंतिम डिजाइन
आईडीए ने प्रस्तावित निर्माण को लेकर प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों को सर्वे का काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के आधार पर दोनों ब्रिज का सही अलाइनमेंट, ऊंचाई, चौड़ाई, संरचना और आसपास के मार्गों पर यातायात व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा। चूंकि नए पुलों की ऊंचाई मौजूदा शास्त्री ब्रिज से अधिक रखी जाएगी, इसलिए डिजाइन तैयार करते समय आसपास के रास्तों और ट्रैफिक फ्लो का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद रीगल और गांधी हॉल के बीच रेलवे क्रॉसिंग वाले हिस्से में यातायात को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही दो अलग-अलग पुलों पर आने-जाने वाले ट्रैफिक को बांटने से इस महत्वपूर्ण मार्ग पर वाहनों के दबाव को कम करने का प्रयास किया जाएगा।









