SEBI के नए नियमों के साथ बदला शेयर बाजार का कामकाज
भारतीय शेयर बाजार में 3 अगस्त 2026 से कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं। इन नए नियमों को बाजार नियामक SEBI ने निवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से लागू किया है। नए बदलावों का असर खासतौर पर F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स पर पड़ेगा। इसके अलावा बाजार खुलने से पहले होने वाली प्रक्रिया और क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके में भी बदलाव किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से बाजार में निष्पक्षता बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
F&O शेयरों की क्लोजिंग प्रक्रिया बदली, अब ऐसे तय होगी अंतिम कीमत
नए नियमों के तहत अब F&O से जुड़े शेयरों की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस पहले की तुलना में अलग प्रक्रिया से तय की जाएगी। नियमित ट्रेडिंग समाप्त होने के बाद क्लोजिंग ऑक्शन सेशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें निवेशक तय समय के भीतर अपने ऑर्डर दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद ऑर्डर मैचिंग की प्रक्रिया पूरी होगी और जिस मूल्य पर अंतिम मिलान होगा, वही उस शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस मानी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है, जिससे बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव और कीमतों में हेरफेर की संभावना कम हो सके।
ट्रेडिंग समय और प्री-ओपनिंग शेड्यूल में भी बदलाव
SEBI द्वारा लागू किए गए नए नियमों के तहत इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट की ट्रेडिंग अवधि भी बढ़ा दी गई है। अब इस सेगमेंट में पहले की तुलना में अधिक समय तक ट्रेडिंग की जा सकेगी, जिससे निवेशकों को अपनी रणनीति के अनुसार बेहतर निर्णय लेने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। वहीं प्री-ओपनिंग सेशन का शेड्यूल भी संशोधित किया गया है। हालांकि नियमित ट्रेडिंग का समय सुबह 9:15 बजे ही रहेगा, लेकिन बाजार खुलने से पहले ऑर्डर एंट्री और ऑर्डर मैचिंग की प्रक्रिया नए समय के अनुसार संचालित होगी। इससे शुरुआती ट्रेडिंग अधिक व्यवस्थित और संतुलित होने की उम्मीद है।
निवेशकों और बाजार को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार इन बदलावों से बाजार में पारदर्शिता और लिक्विडिटी बढ़ेगी। क्लोजिंग प्राइस अधिक निष्पक्ष तरीके से तय होने से इंडेक्स फंड और पैसिव फंड्स की ट्रैकिंग में सटीकता आएगी तथा कीमतों में कृत्रिम उतार-चढ़ाव की संभावना कम होगी। इसके साथ ही भारतीय शेयर बाजार की कार्यप्रणाली अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मानकों के और करीब पहुंचेगी। निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए यह जरूरी है कि वे नए नियमों को अच्छी तरह समझकर अपनी निवेश और ट्रेडिंग रणनीति में आवश्यक बदलाव करें, ताकि बदलती व्यवस्था का पूरा लाभ उठाया जा सके।










