मध्यप्रदेश में नल-जल योजना की जमीनी हकीकत: 8 जिलों में आधे से ज्यादा परिवार अब भी पानी के कनेक्शन से दूर, सीहोर-विदिशा भी पिछड़े

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भोपाल। मध्यप्रदेश में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन के तहत लगातार काम किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जिला स्तर पर सामने आए आंकड़े कई इलाकों में योजना की धीमी रफ्तार की तस्वीर दिखाते हैं। प्रदेश में जहां कुल 77 प्रतिशत से ज्यादा परिवारों तक नल-जल सुविधा पहुंचने की बात कही जा रही है, वहीं कई जिलों में अभी भी बड़ी आबादी घरेलू नल कनेक्शन से वंचित है।

सबसे ज्यादा चिंता उन आठ जिलों को लेकर है, जहां 50 प्रतिशत से भी कम परिवारों को घरेलू नल-जल कनेक्शन मिल पाया है। इनमें मऊगंज, अशोकनगर, पन्ना, सतना, आलीराजपुर, छतरपुर, सिंगरौली और मैहर शामिल हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में परिवारों को अभी भी पानी की जरूरतों के लिए दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

8 जिलों में आधे से कम घरों तक पहुंचा नल का पानी

जिला स्तर के उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो मैहर की स्थिति सबसे कमजोर दिखाई देती है, जहां करीब 40 प्रतिशत परिवारों तक ही घरेलू नल कनेक्शन पहुंच पाया है। सिंगरौली में यह आंकड़ा लगभग 41 प्रतिशत है, जबकि छतरपुर और आलीराजपुर में करीब 43 प्रतिशत परिवारों को नल-जल सुविधा मिली है।

सतना में भी आधे से कम परिवारों तक घरेलू नल कनेक्शन पहुंचा है। पन्ना में करीब 45 प्रतिशत और अशोकनगर में लगभग 47 प्रतिशत परिवार इस सुविधा से जुड़े हैं। मऊगंज में भी कवरेज 50 प्रतिशत के आसपास ही है। इसका सीधा मतलब है कि इन जिलों के आधे से ज्यादा परिवार अभी सरकारी नल-जल कनेक्शन के दायरे में नहीं आ पाए हैं।

सीहोर और विदिशा में भी लक्ष्य से काफी पीछे

पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। यहां करीब 57 प्रतिशत परिवारों तक घरेलू नल-जल सुविधा पहुंचने की जानकारी है। यानी लगभग 43 प्रतिशत परिवार अभी भी इस सुविधा से बाहर हैं।

पड़ोसी विदिशा में कवरेज सीहोर से बेहतर है, लेकिन वहां भी करीब एक-तिहाई परिवारों तक नल का पानी नहीं पहुंचा है। आंकड़ों के अनुसार विदिशा में लगभग 67 प्रतिशत परिवार नल-जल सुविधा से जुड़े हैं। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य जिले भी 70 प्रतिशत कवरेज का स्तर हासिल नहीं कर पाए हैं। इनमें जबलपुर, बड़वानी, डिंडौरी, टीकमगढ़, रतलाम, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, गुना, नीमच, रीवा, शिवपुरी और सीधी जैसे जिले शामिल हैं।

बड़े जल प्रोजेक्ट पूरे होने का इंतजार

कम कवरेज वाले जिलों को लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का कहना है कि कई क्षेत्रों में जल आपूर्ति की व्यवस्था बड़ी योजनाओं पर निर्भर है। बहु-ग्राम जल योजनाओं और थोक जल आपूर्ति परियोजनाओं के जरिए एक साथ बड़ी संख्या में गांवों को पानी उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

इनमें से कई परियोजनाएं अभी निर्माण या क्रियान्वयन के अलग-अलग चरणों में हैं। विभाग को उम्मीद है कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद संबंधित जिलों में नल-जल कनेक्शन का दायरा तेजी से बढ़ेगा। हालांकि, जब तक ये परियोजनाएं पूरी नहीं होतीं, तब तक ग्रामीण परिवारों को स्थानीय जल स्रोतों या वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

पानी की उपलब्धता के साथ गुणवत्ता जांच भी चुनौती

सिर्फ घरों तक पानी पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता की जांच भी जरूरी है। मध्यप्रदेश में पानी की गुणवत्ता जांच के लिए अलग-अलग स्तरों पर प्रयोगशालाएं संचालित की जा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में कुल 155 प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें उप-मंडल और जिला स्तर की लैब के साथ एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भी शामिल है।

इन प्रयोगशालाओं में पानी के माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि, सभी प्रकार की जांच की सुविधाएं समान स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं। बीओडी जैसी जांच मुख्य रूप से राज्य स्तरीय प्रयोगशाला में होती है, जबकि कुछ रासायनिक विषाक्तता से जुड़ी जांच की व्यवस्था को लेकर भी सीमाएं बताई गई हैं।

लक्ष्य बड़ा, लेकिन कई जिलों में काम अभी बाकी

जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को घर के स्तर पर सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश में कुल कवरेज का आंकड़ा 77 प्रतिशत से अधिक पहुंचने के बावजूद जिलों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। कुछ जिले लक्ष्य के काफी करीब हैं, जबकि कई जगह आधे से ज्यादा परिवार अभी भी नल-जल सुविधा से बाहर हैं।

अब बड़ी चुनौती उन पिछड़े जिलों में योजनाओं को समय पर पूरा करने की है, जहां कवरेज 50 प्रतिशत से भी नीचे है। बड़ी जल परियोजनाओं के पूरा होने, नए कनेक्शन देने और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच से ही इन जिलों के आंकड़ों में सुधार संभव होगा। फिलहाल जिला स्तर के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि मध्यप्रदेश में हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए कई क्षेत्रों में अभी लंबा काम बाकी है।

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