भोपाल में रिहायशी मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी
भोपाल शहर में अपने घर या रिहायशी भवन से दुकान, ब्यूटी पार्लर, सैलून, कोचिंग, क्लिनिक, बुटीक या अन्य व्यवसाय संचालित करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भोपाल नगर निगम अब ऐसे भवनों की पहचान के लिए शहरभर में व्यापक सर्वे शुरू करने जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब एक लाख ऐसी संपत्तियां सामने आ सकती हैं, जहां आवासीय उपयोग के लिए दर्ज भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस दिया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर आगे सीलिंग जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
21 जोन में चलेगा सर्वे, रिकॉर्ड से होगा मिलान
नगर निगम ने पूरे भोपाल को 21 जोन में बांटकर सर्वे के लिए विशेष टीमें तैयार की हैं। इन टीमों का काम केवल प्रमुख बाजारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कॉलोनियों, गली-मोहल्लों और अन्य रिहायशी इलाकों में भी ऐसे भवनों की जांच की जाएगी, जहां किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि चल रही है। निगम संपत्ति कर के रिकॉर्ड, भवन के स्वीकृत उपयोग, सड़क की चौड़ाई और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान करेगा। वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी भवनों के इस्तेमाल की जांच की जाएगी।
नगर निगम ने सर्वे को करीब 10 से 15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान यदि किसी संपत्ति में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो मौके पर ही संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया जा सकता है। निगम के मौजूदा रिकॉर्ड में लगभग 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं, लेकिन इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां भी हो सकती हैं जहां व्यवसाय तो संचालित हो रहा है, लेकिन उसका उपयोग परिवर्तन या अन्य जरूरी अनुमति नहीं ली गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी कार्रवाई
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई को तेज करने की तैयारी की है। 5 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संबंधित मामलों में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए थे। साथ ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकानदारों को मिली अंतरिम राहत से जुड़े आदेशों को भी निरस्त किया गया। कोर्ट ने अवैध निर्माण और रिहायशी भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े मामलों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
इसी के बाद नगर निगम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। सर्वे के आधार पर सामने आने वाली संपत्तियों की स्थिति की जांच की जाएगी और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई तय होगी। हालांकि, किसी भी संपत्ति पर अंतिम कार्रवाई संबंधित नियमों और प्रक्रिया के तहत ही होगी।
व्यापारियों की मांग-छोटे कारोबार और मुख्य सड़कों को मिले राहत
प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर व्यापारियों की ओर से भी कुछ वैकल्पिक सुझाव सामने आए हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि छोटे स्तर पर घरों से संचालित होने वाले कारोबार और लंबे समय से प्रमुख सड़कों पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। ब्यूटी पार्लर, सैलून, कोचिंग सेंटर, छोटी किराना दुकान और इसी तरह के कारोबार के लिए अलग नियम या राहत का प्रावधान किया जा सकता है।
व्यापारियों ने भोपाल की प्रमुख सड़कों और व्यावसायिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई है। इसके तहत कुछ निर्धारित इलाकों में जमीन और भवन का इस्तेमाल आवासीय तथा व्यावसायिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा। लिंक रोड, कोलार रोड, होशंगाबाद रोड, हमीदिया रोड, बैरागढ़ रोड, रायसेन रोड और प्रमुख बाजार क्षेत्रों जैसे इलाकों को ऐसी व्यवस्था के दायरे में लाने का सुझाव दिया गया है।
मास्टरप्लान को लेकर भी उठ रहे सवाल
भोपाल में लंबे समय से नए मास्टर प्लान को लेकर चर्चा होती रही है। व्यापारिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं का कहना है कि शहर के विकास और बढ़ती व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप नियोजन जरूरी है। उनका तर्क है कि पर्याप्त संख्या में व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई कारोबारियों ने वर्षों पहले आवासीय क्षेत्रों से अपना व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे वे क्षेत्र भी व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बन गए।
भोपाल का पिछला मास्टर प्लान वर्ष 2005 में लागू हुआ था। इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका है। इसी वजह से शहर में बदलती आबादी, ट्रैफिक, बाजारों और व्यावसायिक गतिविधियों के हिसाब से जमीन के इस्तेमाल को लेकर कई जगह विवाद की स्थिति बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि नए मास्टर प्लान के साथ ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित किया जाना चाहिए जहां नियंत्रित तरीके से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को अनुमति दी जा सके।
व्यापारियों का तर्क-सरकार को भी मिलता है राजस्व
व्यापारी संगठनों का कहना है कि जिन इलाकों में लंबे समय से अस्पताल, बैंक, क्लिनिक, शोरूम और अन्य सेवाएं संचालित हो रही हैं, वहां अचानक बड़े स्तर पर कार्रवाई से व्यापारियों और स्थानीय लोगों दोनों पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि कई व्यवसायी नगर निगम को व्यावसायिक दर से संपत्ति कर और अन्य संबंधित शुल्क का भुगतान करते हैं। बिजली का बिल भी कई मामलों में व्यावसायिक दर से लिया जाता है।
व्यापारियों की मांग है कि कार्रवाई से पहले शहर की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक नीति बनाई जाए। उनका सुझाव है कि जिन इलाकों में वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, वहां नियमों के तहत नियमितीकरण या मिक्स लैंड यूज का विकल्प तलाशा जाए। वहीं, जिन क्षेत्रों में नियमों का गंभीर उल्लंघन है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल नगर निगम की सर्वे प्रक्रिया पर सभी की नजर है। आने वाले दिनों में सर्वे से यह स्पष्ट होगा कि कितनी संपत्तियां वास्तव में रिहायशी उपयोग के नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रही हैं। इसके बाद नोटिस और आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।










