MP के 3 सरकारी कॉलेजों में अब संस्कृत की पढ़ाई, 2026-27 सत्र से विद्यार्थियों को मिलेगा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का मौका

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भोपाल। मध्य प्रदेश में भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल की गई है। प्रदेश के तीन शासकीय महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संस्कृत विषय की पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग की ओर से संबंधित कॉलेजों को मंजूरी दे दी गई है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और विरासत से परिचित कराना है।

इन तीन कॉलेजों में शुरू होगी पढ़ाई

प्रदेश के जिन तीन सरकारी कॉलेजों को संस्कृत विषय संचालित करने की अनुमति मिली है, उनमें विदिशा जिले का शासकीय कन्या महाविद्यालय बासौदा, शाजापुर जिले का जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शुजालपुर और आगर-मालवा जिले का शासकीय महाविद्यालय सोयतकलां शामिल हैं। तीनों संस्थानों में इसी शैक्षणिक सत्र से संस्कृत का पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।

इस फैसले के बाद इन कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को संस्कृत को एक विषय के रूप में अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से इसे भारतीय भाषाओं को उच्च शिक्षा के स्तर पर प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ेंगे विद्यार्थी

उच्च शिक्षा विभाग का जोर केवल संस्कृत भाषा की पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और पारंपरिक विचारधारा से परिचित कराने पर भी है। संस्कृत को भारतीय साहित्य, दर्शन, इतिहास और प्राचीन ज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक माना जाता है। ऐसे में कॉलेज स्तर पर इसके अध्ययन से विद्यार्थियों को इन विषयों को समझने का अवसर मिल सकता है।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के अनुसार, प्रदेश में उच्च शिक्षा को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के साथ-साथ ज्ञान, संस्कार, संस्कृति और नवाचार से समृद्ध करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी सोच के तहत भारतीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल की गई है।

नए सत्र से लागू होगा पाठ्यक्रम

तीनों शासकीय कॉलेजों में संस्कृत विषय का संचालन शैक्षणिक सत्र 2026-27 से किया जाएगा। इससे इन संस्थानों के विद्यार्थियों को अपनी नियमित उच्च शिक्षा के साथ संस्कृत का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। सरकार की इस पहल से प्रदेश के अन्य कॉलेजों में भी भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विषयों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश के इन तीन सरकारी कॉलेजों में संस्कृत की पढ़ाई शुरू होना उन विद्यार्थियों के लिए नया शैक्षणिक विकल्प लेकर आएगा, जो भारतीय भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े विषयों में रुचि रखते हैं।

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