भोपाल। राजधानी भोपाल के कलियासोत डैम क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से जुड़ा मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंच गया है। स्टेट डेयरी फार्म की जमीन पर पौधरोपण की तैयारी के दौरान बड़ी संख्या में पुराने पेड़ों को हटाए जाने के आरोपों पर एनजीटी ने गंभीर रुख अपनाया है। मामले में राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा गया है।
10 हजार पौधे लगाने के लिए तैयार की जा रही थी जमीन
मामला कलियासोत डैम क्षेत्र स्थित स्टेट डेयरी फार्म की करीब 8 एकड़ जमीन से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में करीब 10 हजार पौधे लगाने की योजना के तहत जमीन तैयार करने का काम कराया जा रहा था। इसके लिए नगर निगम की ओर से एक निर्माण कंपनी को काम सौंपे जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि पौधरोपण के लिए जगह बनाने के दौरान वहां पहले से मौजूद बड़ी संख्या में पेड़ों और वनस्पतियों को हटा दिया गया।
परिपक्व पेड़ों को मशीनों से हटाने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से एनजीटी को बताया गया कि जमीन साफ करने के दौरान 700 से अधिक पेड़ों को नुकसान पहुंचा या उन्हें जड़ सहित हटा दिया गया। इनमें बबूल, बेर, शीशम, गूलर और महुआ जैसी प्रजातियों के पेड़ शामिल होने का दावा किया गया है। आरोप है कि कई पेड़ काफी पुराने और विकसित थे, जिन्हें मशीनों की मदद से हटाया गया। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया कि क्या पेड़ों को हटाने से पहले संबंधित कानूनी अनुमति ली गई थी।
पेड़ काटने की अनुमति को लेकर भी उठे सवाल
मामले में मध्य प्रदेश वृक्ष (नगरीय क्षेत्र) संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत आवश्यक अनुमति लिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि पेड़ों को हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तो यह पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हो सकता है। इसी पहलू की जांच अब एनजीटी की निगरानी में गठित समिति करेगी।
तीन सदस्यीय समिति करेगी मौके की जांच
एनजीटी ने पूरे मामले की वास्तविक स्थिति पता लगाने के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है। इसमें कलेक्टर के प्रतिनिधि, पर्यावरण एवं वन विभाग के संभागीय वन अधिकारी तथा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। समिति मौके का निरीक्षण करने के बाद पेड़ों की कटाई, पौधरोपण की योजना और संबंधित अनुमति समेत पूरे मामले की तथ्यात्मक जानकारी जुटाएगी।
छह सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट, 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई
गठित समिति को अपनी जांच पूरी करके छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मामले से जुड़े प्रतिवादियों को भी इसी अवधि में अपना जवाब दाखिल करना होगा। एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की है। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पौधरोपण के लिए जमीन तैयार करने के दौरान पेड़ों को हटाने में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।










