जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिलने जा रही है। लंबे समय से प्रस्तावित महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी मिलने के बाद शहर की शिक्षा व्यवस्था को नया विस्तार मिलने की उम्मीद है। इस विश्वविद्यालय से जबलपुर के साथ-साथ सागर, शहडोल और रीवा संभाग के सरकारी और निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों को जोड़े जाने की योजना है। इससे विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा से जुड़े कई कामों के लिए भोपाल जाने की जरूरत कम होगी और क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा का बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।
आठ साल पुराने प्रस्ताव को मिली मंजूरी
जबलपुर में तकनीकी विश्वविद्यालय की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसका प्रस्ताव वर्ष 2018 से चर्चा में था, लेकिन इसे अमली रूप देने में समय लगा। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी है। विश्वविद्यालय के लिए करीब 200 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें नए प्रशासनिक ढांचे, जरूरी सुविधाओं और अतिरिक्त पदों के सृजन जैसे कार्य शामिल किए जा सकते हैं।
चार संभागों के तकनीकी संस्थानों को मिलेगा लाभ
नए विश्वविद्यालय का दायरा केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। इसके अंतर्गत जबलपुर के अलावा सागर, शहडोल और रीवा संभाग में संचालित तकनीकी शिक्षण संस्थानों को जोड़े जाने की योजना है। इससे इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्रवेश, परीक्षा, परिणाम और शोध से संबंधित कार्यों के लिए जबलपुर स्थित विश्वविद्यालय से जुड़ने का अवसर मिलेगा। क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा का एक केंद्रीकृत अकादमिक ढांचा विकसित होने से विद्यार्थियों और संस्थानों दोनों को फायदा होने की उम्मीद है।
जबलपुर पहले से है उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र
जबलपुर में पहले से कई प्रमुख शासकीय विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान संचालित हैं। इनमें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय और धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी शामिल हैं। इसके अलावा जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज समेत कई तकनीकी संस्थान भी शहर में मौजूद हैं। नए तकनीकी विश्वविद्यालय के जुड़ने से शहर की पहचान उच्च और तकनीकी शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में और मजबूत हो सकती है।
जेईसी को भी मिलेगा विस्तार का अवसर
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास करीब 160 एकड़ का परिसर है और यहां स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर के कई पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। संस्थान में विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन बड़ी संख्या में पद अभी रिक्त बताए गए हैं। विश्वविद्यालय के विकास के साथ नए पदों और सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ेगी। इसके लिए प्रशासनिक भवन समेत अन्य निर्माण और संसाधनों को विकसित करने की योजना पर काम किया जा सकता है।
विद्यार्थियों और रोजगार के लिए नई संभावनाएं
नए विश्वविद्यालय से क्षेत्र के विद्यार्थियों को तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय के विस्तार के साथ नए पाठ्यक्रम, शोध गतिविधियां, शैक्षणिक पद और प्रशासनिक जरूरतें भी विकसित हो सकती हैं। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। साथ ही महाकोशल, विंध्य और बुंदेलखंड के तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर शैक्षणिक समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिल सकती है।










