नीलम पार्क में भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थी
भोपाल में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 की शिक्षक भर्ती से जुड़े युवा राजधानी के नीलम पार्क में धरने और भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने सरकार की ओर से निर्धारित पात्रता और चयन परीक्षाएं पास की हैं, लेकिन पर्याप्त संख्या में पद उपलब्ध नहीं होने के कारण योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पा रहा है। खास बात यह है कि तीनों वर्गों के अभ्यर्थी इस बार एक साथ अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
तबीयत बिगड़ी, फिर भी अनशन जारी रखने पर अड़ीं अभ्यर्थी
आंदोलन के दौरान एक अभ्यर्थी की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। वर्ग-2 की अभ्यर्थी प्रियंका सिंह के स्वास्थ्य में परेशानी आने के बावजूद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक शिक्षक भर्ती से जुड़ी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अभ्यर्थियों के मुताबिक 31 अगस्त से चल रहा प्रदर्शन अब बड़ा रूप ले चुका है और वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
खाली पदों का हवाला देकर भर्ती बढ़ाने की मांग
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 1.15 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या अपेक्षाकृत कम रखे जाने से हजारों योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से बाहर रह गए हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार वर्ष 2024 में पात्रता परीक्षा और वर्ष 2025 में चयन परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 40 प्रतिशत न्यूनतम अंक निर्धारित किए गए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई अभ्यर्थियों ने बहुत अच्छे अंक हासिल किए हैं, इसके बावजूद रिक्तियों की सीमित संख्या के कारण उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल पा रही है।
वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से भर्ती के पद बढ़ाने की मांग रखी है। उनके मुताबिक वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के लिए कम से कम 3 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाए जाने चाहिए। वहीं वर्ग-3 के अभ्यर्थी कुल 25 हजार पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की बात सामने आती है और दूसरी ओर भर्ती में सीमित पद रखे जाते हैं। इसी विरोधाभास को लेकर युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि रिक्त पदों को ध्यान में रखते हुए भर्ती का दायरा बढ़ाया जाए तो योग्य उम्मीदवारों को रोजगार मिल सकता है और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी दूर करने में मदद मिलेगी।










