भोपाल की शाहपुरा झील को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का कड़ा रुख, नगर निगम और प्रशासन से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
भोपाल। शाहपुरा झील और उसके आसपास हो रहे निर्माण एवं अतिक्रमण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि भोज वेटलैंड का हिस्सा मानी जाने वाली शाहपुरा झील के फुल टैंक लेवल (FTL) से शहरी क्षेत्र की दिशा में 50 मीटर तक का क्षेत्र निर्माण गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित रहेगा। एनजीटी ने प्रशासन को झील की वास्तविक सीमा तय करने, अतिक्रमण चिन्हित कर हटाने और प्रतिबंधित क्षेत्र की जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी जलाशय को बांध या अन्य नाम देने से उसका वेटलैंड का दर्जा समाप्त नहीं हो जाता। शाहपुरा झील भोज वेटलैंड का हिस्सा है, इसलिए इसके संरक्षण और प्रबंधन पर वेटलैंड संबंधी नियम लागू होंगे।
झील का सीमांकन कर हटाना होगा अतिक्रमण
एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्टों में शाहपुरा वेटलैंड के क्षेत्रफल को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। संयुक्त समिति ने इसका क्षेत्रफल 47.2205 हेक्टेयर बताया, जबकि नगर निगम की ओर से 49.11 हेक्टेयर क्षेत्र होने की जानकारी दी गई। ट्रिब्यूनल ने इन आंकड़ों के अंतर और झील की सीमा स्पष्ट न होने पर चिंता जताई है।
जांच में यह बात भी सामने आई कि कुछ स्थानों पर अतिक्रमण के साथ बिना उपचारित पानी का प्रवाह झील की ओर हो रहा है। एनजीटी ने अब तक की कार्रवाई को पर्याप्त नहीं माना और संबंधित अधिकारियों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
कोलार एसडीएम को झील के सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में अधिकारियों को शपथपत्र के साथ अपनी कार्रवाई का विवरण देना होगा।
निगम वेबसाइट पर सार्वजनिक करेगा FTL और बफर जोन की जानकारी
एनजीटी ने भोपाल नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि शाहपुरा झील के FTL, बफर जोन और जोन ऑफ इन्फ्लुएंस से जुड़ी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए। यह विवरण निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे आम लोगों और संबंधित विभागों को प्रतिबंधित क्षेत्र की सही जानकारी मिल सके।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि झील के संरक्षित दायरे में भविष्य में नए निर्माण की अनुमति न दी जाए और पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जा सके।
वेटलैंड की संख्या को लेकर भी रिकॉर्ड में अंतर
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश में दर्ज वेटलैंड की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए। एक रिकॉर्ड में प्रदेश में 13,565 वेटलैंड दर्ज बताए गए, जबकि दूसरे दस्तावेज में यह संख्या 15,152 है। इस अंतर को देखते हुए एनजीटी ने जिला स्तर पर वेटलैंड की सूची सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही छोटे आकार के वेटलैंड की भी पहचान कर उन्हें रिकॉर्ड में शामिल करने पर जोर दिया गया है, ताकि जल स्रोतों के संरक्षण की व्यवस्था अधिक प्रभावी बनाई जा सके।
16 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
शाहपुरा तालाब से जुड़े अतिक्रमण के मामलों में एनजीटी ने कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और मध्य प्रदेश राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को पूर्व आदेशों के अनुसार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के बाद विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।










