मध्य प्रदेश में टोल व्यवस्था का बड़ा बदलाव: अब बिना रुके गुजरेंगे वाहन, फंदा प्लाजा पर शुरू हुआ बैरियर-फ्री ऑटोमैटिक टोल सिस्टम

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भोपाल-देवास मार्ग पर नई तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट, सफल होने पर 2027 से सभी लेनों में लागू करने की तैयारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार और बैरियर खुलने का इंतजार जल्द इतिहास बन सकता है। राज्य सड़क विकास निगम ने प्रदेश में पहली बार अत्याधुनिक बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली का परीक्षण शुरू किया है। भोपाल-देवास मार्ग स्थित फंदा टोल प्लाजा की एक लेन में इस नई व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है।

इस तकनीक के तहत वाहन चालकों को टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिस्टम चलते हुए वाहन की पहचान करेगा और फास्टैग के माध्यम से स्वचालित रूप से टोल शुल्क काट लिया जाएगा। नई व्यवस्था से यात्रा का समय कम होने के साथ टोल प्लाजा पर होने वाली भीड़ और यातायात दबाव भी घटने की उम्मीद है।

तेज रफ्तार में भी होगी वाहन की पहचान और कटेगा टोल

नई बैरियर-फ्री तकनीक को इस तरह तैयार किया गया है कि वाहन को गति कम करने या रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरने वाले वाहन की भी स्वचालित पहचान कर टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

इसके लिए टोल लेन में आधुनिक फास्टैग रीडर, उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे, वाहन पहचान सेंसर और ऑटोमैटिक क्लासिफिकेशन सिस्टम लगाए गए हैं। वाहन के गुजरते ही तकनीक उसके फास्टैग और वाहन श्रेणी की जानकारी प्राप्त करेगी और निर्धारित शुल्क खाते से काट देगी।

वर्तमान में टोल प्लाजा पर बैरियर होने के कारण वाहनों को रुकना पड़ता है, जिससे व्यस्त समय में लंबी कतारें लग जाती हैं। नई प्रणाली लागू होने से ईंधन की बचत और सफर को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

फास्टैग में बैलेंस नहीं तो वाहन मालिक को मिलेगा ई-चालान

नई व्यवस्था में उन वाहनों के लिए भी अलग प्रावधान किया गया है जिनके फास्टैग में पर्याप्त राशि नहीं होगी या तकनीकी कारणों से तत्काल भुगतान संभव नहीं हो पाएगा। ऐसे मामलों में वाहन को रोकने के बजाय उसके मालिक को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से टोल भुगतान की सूचना या ई-चालान भेजा जाएगा।

वाहन मालिक को निर्धारित समय के भीतर बकाया राशि जमा करनी होगी। समय सीमा के अंदर भुगतान नहीं होने पर नियमानुसार अतिरिक्त शुल्क या जुर्माने के साथ राशि की वसूली की जा सकती है।

सफल परीक्षण के बाद सभी टोल लेनों तक पहुंचेगी नई व्यवस्था

फिलहाल फंदा टोल प्लाजा पर इस सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है। सड़क विकास निगम पायलट प्रोजेक्ट के प्रदर्शन और तकनीकी परिणामों का अध्ययन करेगा। व्यवस्था सफल रहने पर इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

प्रस्तावित योजना के अनुसार वर्ष 2027 की शुरुआत से भोपाल-देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम लागू किया जा सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख टोल प्लाजा पर भी बिना रुके स्वचालित टोल भुगतान की व्यवस्था शुरू होने का रास्ता खुल सकता है।

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