ITR Filing Alert 2026: 31 जुलाई की डेडलाइन चूके तो लगेगी लेट फीस, गलत जानकारी देने पर 200% तक पेनल्टी, जानिए आयकर विभाग के नियम

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ITR भरने से पहले जान लें जरूरी नियम

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए 31 जुलाई बेहद अहम तारीख मानी जाती है। इस दिन तक रिटर्न दाखिल करने पर किसी प्रकार की लेट फीस नहीं देनी पड़ती। लेकिन यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न फाइल करता है या जल्दबाजी में गलत जानकारी दर्ज कर देता है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क और पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए रिटर्न जमा करने से पहले सभी दस्तावेजों और आय संबंधी जानकारी का मिलान करना जरूरी है।

समय सीमा के बाद ITR भरने पर कितना लगेगा जुर्माना?

यदि कोई करदाता 31 जुलाई के बाद अपना रिटर्न दाखिल करता है, तो उसे बिलेटेड ITR के रूप में रिटर्न जमा करना होगा। आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत टैक्स योग्य आय 5 लाख रुपये से अधिक होने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। वहीं, जिनकी टैक्स योग्य आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, उनके लिए यह शुल्क 1,000 रुपये तक निर्धारित किया गया है। इसके अलावा यदि टैक्स बकाया है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत उस पर ब्याज भी लगाया जा सकता है।

गलत जानकारी देने पर भारी पेनल्टी का प्रावधान

ITR भरते समय यदि कोई व्यक्ति अपनी आय छिपाता है, गलत दावे करता है या टैक्स से जुड़ी गलत जानकारी देता है, तो आयकर विभाग कार्रवाई कर सकता है। नियमों के अनुसार, यदि गलती सामान्य स्तर की पाई जाती है तो बचाए गए टैक्स पर 50% तक पेनल्टी लग सकती है। वहीं यदि जांच में जानबूझकर गलत जानकारी देने या टैक्स चोरी करने की पुष्टि होती है, तो बचाए गए टैक्स का 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

ITR प्रोसेस और रिफंड को लेकर क्या जानना जरूरी है?

रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होता है। यदि निर्धारित समय के भीतर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया जाता, तो रिटर्न अधूरा माना जा सकता है। ई-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आयकर विभाग का सेंट्रल प्रोसेसिंग सिस्टम रिटर्न की जांच करता है। सामान्य परिस्थितियों में कुछ दिनों के भीतर प्रोसेसिंग पूरी हो जाती है और यदि टैक्स रिफंड बनता है, तो वह सीधे करदाता के बैंक खाते में भेज दिया जाता है। प्रोसेसिंग पूरी होने की सूचना ईमेल और एसएमएस के माध्यम से भी दी जाती है।

इन गलतियों से बचें

ITR दाखिल करने से पहले पैन, आधार, बैंक अकाउंट, फॉर्म 16, AIS, TIS और अन्य आय संबंधी दस्तावेजों का मिलान जरूर करें। गलत बैंक विवरण, आय छिपाना, कटौती (Deduction) का गलत दावा करना या ई-वेरिफिकेशन भूल जाना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है। समय पर और सही जानकारी के साथ ITR दाखिल करने से अनावश्यक जुर्माने और नोटिस से बचा जा सकता है।

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