सुनवाई से पहले बढ़ी हलचल, कोर्ट में पेश होंगे नए तथ्य
भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में लंबे समय से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में याचिका दायर करने वाले रहवासियों का कहना है कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होंगे और हाल ही में हुई नगर निगम की कार्रवाई से जुड़े फोटो और वीडियो अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। उनका दावा है कि कई इलाकों में नियमों का उल्लंघन करते हुए रिहायशी भवनों का वर्षों से व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम की कार्रवाई, सरकार की बैठक और व्यापारियों को राहत
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने कई स्थानों पर कार्रवाई करते हुए कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील किया था, जबकि कई व्यापारियों ने स्वयं ही अपने प्रतिष्ठान अस्थायी रूप से बंद कर दिए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूरे मामले की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले के बाद शहर के अधिकांश बाजारों में फिर से गतिविधियां सामान्य होती दिखाई दीं।
रहवासियों और व्यापारियों के बीच अलग-अलग मांगें
रहवासी संगठनों का कहना है कि नगर निगम ने अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की और जिन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई थी, उनमें से कई दोबारा संचालित होने लगे हैं। दूसरी ओर व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि शहर में नया मास्टर प्लान वर्षों से लागू नहीं होने के कारण पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके। इसी वजह से बड़ी संख्या में व्यापारी मजबूरी में आवासीय परिसरों से अपना कारोबार चला रहे हैं। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से कमर्शियल दरों पर संपत्ति कर, बिजली बिल और अन्य सरकारी शुल्क का भुगतान भी करते हैं।
मिक्स लैंड यूज व्यवस्था की मांग हुई तेज
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज सहित कई व्यापारिक संगठनों ने सरकार से मिक्स लैंड यूज नीति लागू करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि इससे व्यापारियों को कानूनी राहत मिलेगी और शहर के विकास को भी गति मिलेगी। वहीं कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी नया मास्टर प्लान जल्द लागू करने की आवश्यकता जताई है, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार की अगली रणनीति पर बनी हुई है, क्योंकि इस फैसले का असर हजारों व्यापारियों और बड़ी संख्या में रहवासियों पर पड़ सकता है।










