विदिशा में बच्चों की सुरक्षा को मिली बड़ी राहत: डैम पार कर स्कूल जाने की मजबूरी खत्म, वायरल वीडियो के बाद बंधेरा स्कूल बना हाई स्कूल

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वायरल वीडियो के बाद सरकार ने लिया बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से सामने आए उस वीडियो ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था, जिसमें स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी के स्टॉप डैम के संकरे पिलरों पर चलते हुए स्कूल पहुंचते दिखाई दिए थे। मामला सामने आने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बंधेरा गांव के मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में अपग्रेड कर दिया है। नए आदेश के अनुसार अब यहां कक्षा 9वीं और 10वीं की पढ़ाई शुरू हो गई है, जिससे स्थानीय विद्यार्थियों को दूर स्थित स्कूल जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

अब नहीं उठाना पड़ेगा जान जोखिम में डालने वाला कदम

अब तक ककरुआ, इमलिया और आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता था। सड़क मार्ग से यह दूरी काफी अधिक थी, इसलिए कई बच्चे समय बचाने के लिए बेतवा नदी के स्टॉप डैम का खतरनाक रास्ता अपनाते थे। दो फीट चौड़े पिलरों पर संतुलन बनाकर नदी पार करना हर दिन जोखिम भरा होता था, खासकर बारिश के मौसम में जब डैम पर पानी बहने लगता था। नए हाई स्कूल की शुरुआत के बाद यह खतरनाक सफर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

सात गांवों के विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ

बंधेरा गांव के स्कूल को हाई स्कूल का दर्जा मिलने से केवल एक या दो गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी राहत मिलेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस क्षेत्र में हाई स्कूल की मांग की जा रही थी, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने तेजी से निर्णय लेते हुए स्कूल का उन्नयन कर दिया, जिससे शिक्षा सुविधाएं अब गांव के करीब ही उपलब्ध हो सकेंगी।

हाई कोर्ट ने भी दिखाई गंभीरता, प्रशासन ने शुरू की आवश्यक व्यवस्थाएं

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले को गंभीर मानते हुए हाई कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायिक टीम ने मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया है और संबंधित रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वहीं शिक्षा विभाग ने नए हाई स्कूल के संचालन के लिए शिक्षकों की नियुक्ति भी कर दी है। अधिकारियों के अनुसार कक्षाएं शुरू होने के साथ ही विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे भविष्य में उन्हें जोखिम भरे रास्तों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

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