इंदौर। मानसून सीजन का आधा समय बीत जाने के बावजूद इंदौर में इस बार बारिश ने निराश किया है। शहर में अब तक केवल लगभग 15 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले एक दशक में इस अवधि की सबसे कम बारिश मानी जा रही है। जुलाई के शुरुआती दिनों के बाद कोई मजबूत बारिश सिस्टम सक्रिय नहीं हो पाया, जिससे पूरे शहर में पर्याप्त वर्षा नहीं हो सकी।
शहर में असमान बारिश का असर
इंदौर के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का वितरण भी समान नहीं रहा। एयरपोर्ट, राजबाड़ा और रीगल जैसे इलाकों में अपेक्षाकृत ज्यादा बारिश हुई, जबकि शहर के पूर्वी हिस्सों में यह आंकड़ा काफी कम रहा। कई क्षेत्रों में अब तक औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर जल संकट की आशंका बढ़ रही है।
जलाशयों में घटता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता
कम बारिश का सीधा असर शहर के जलस्रोतों पर देखने को मिल रहा है। बिलावली तालाब अपनी पूरी क्षमता से काफी नीचे भरा है, जबकि छोटा बिलावली तालाब लगभग सूख चुका है। वहीं, यशवंत सागर का जलस्तर भी घटकर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति को लेकर स्थिति गंभीर हो सकती है।
खेती पर भी पड़ रहा असर
बारिश की कमी का प्रभाव कृषि क्षेत्र पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन, मक्का, धान और उड़द जैसी खरीफ फसलों की बढ़वार पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। कई बार बने बारिश के सिस्टम इंदौर तक प्रभाव नहीं डाल सके और अन्य जिलों की ओर मुड़ गए।
प्रदेश में भी सामान्य से कम वर्षा
सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में भी इस बार बारिश सामान्य से कम रही है। अब तक प्रदेश में औसत वर्षा लगभग 16 इंच दर्ज की गई है, जो सामान्य आंकड़े से करीब 19 प्रतिशत कम है। हालांकि कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश भी हुई है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति संतुलित नहीं है।
आने वाले दिनों में सुधार की उम्मीद
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जिससे आने वाले समय में अच्छी बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो अब तक की कमी में कुछ हद तक सुधार हो सकता है।










