संविदा महिला कर्मचारियों के अधिकारों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: चाइल्ड केयर लीव से इनकार पड़ा भारी, शिक्षा केंद्र संचालक पर ₹50 हजार का व्यक्तिगत जुर्माना

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जबलपुर | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला कर्मचारी को कानून और न्यायालय के आदेशों के तहत मिलने वाले अधिकारों से वंचित किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी इसके लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने महिला कर्मचारी को तत्काल चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) मंजूर करने के निर्देश भी दिए हैं।

महिला कर्मचारी को कई बार लगानी पड़ी अदालत की गुहार

मामला बुरहानपुर की संविदा महिला कर्मचारी आयशा शेख से जुड़ा है। उन्होंने अपने बच्चों की देखभाल के लिए चाइल्ड केयर लीव का आवेदन दिया था, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि संविदा कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ नहीं दिया जा सकता। इसके बाद कर्मचारी ने न्यायालय का रुख किया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि अपने वैधानिक अधिकार के लिए उन्हें कई बार अदालत की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय ने इसे विभागीय लापरवाही और न्यायिक आदेशों की अनदेखी माना।

कोर्ट ने कहा- विभागीय आदेश नहीं, न्यायालय की व्याख्या सर्वोपरि

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की अंतिम व्याख्या न्यायालय करता है और कोई भी विभागीय परिपत्र अदालत के निर्णय से ऊपर नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए न्यायिक फैसलों में संविदा महिला कर्मचारियों को भी चाइल्ड केयर लीव का लाभ देने की व्यवस्था स्पष्ट की जा चुकी है, इसलिए विभाग का इनकार उचित नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी द्वारा न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों की अनदेखी कर निर्णय लिया जाता है, तो उसके लिए व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।

तत्काल अवकाश स्वीकृत करने और जुर्माना जमा करने के आदेश

हाईकोर्ट ने राज्य शिक्षा केंद्र को निर्देश दिया कि संबंधित महिला कर्मचारी का चाइल्ड केयर लीव आवेदन तुरंत स्वीकृत किया जाए। साथ ही संचालक हरजिंदर सिंह को 30 दिनों के भीतर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना जमा करने का आदेश भी दिया गया।

कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला संविदा महिला कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भविष्य में ऐसे मामलों में विभागों को न्यायालय के पूर्व निर्णयों और कानून के अनुरूप ही कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर व्यक्तिगत कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी।

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