सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की मर्चुरी की सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान स्कूल यूनिफॉर्म में दो छात्राएं मर्चुरी के अंदर मौजूद थीं। दोनों छात्राएं काफी देर तक वहां रहीं और बाद में बाहर निकलीं। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की ओर से अलग-अलग स्तर पर सफाई दी गई है।
पोस्टमार्टम के दौरान मर्चुरी में मौजूद थीं छात्राएं
बताया जा रहा है कि शुक्रवार दोपहर जिला अस्पताल की मर्चुरी में पन्ना निवासी दुर्गेश सिंह के शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा था। इसी दौरान दो स्कूली छात्राओं के वहां मौजूद होने की बात सामने आई। दोनों छात्राएं स्कूल बैग और यूनिफॉर्म में थीं तथा उन्होंने मास्क लगा रखा था। जानकारी के मुताबिक, वे करीब डेढ़ घंटे से अधिक समय तक मर्चुरी के अंदर रहीं। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के डॉ. प्रतीक शुक्ला सहित अन्य लोग भी वहां मौजूद थे। छात्राओं को मर्चुरी में प्रवेश कैसे मिला और उन्हें पोस्टमार्टम के दौरान वहां रहने की अनुमति किस स्तर से मिली, यही इस पूरे मामले का मुख्य सवाल बना हुआ है।
अधिकारियों ने अनुमति दिए जाने से किया इनकार
मामले को लेकर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से जुड़े अधिकारियों ने छात्राओं को मर्चुरी में प्रवेश की अनुमति दिए जाने से इनकार किया है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एसपी गर्ग के अनुसार, स्कूली बच्चों के लिए पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान मर्चुरी में प्रशिक्षण जैसी कोई व्यवस्था निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों को भी वहां जाने के लिए निर्धारित अनुमति और प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला ने भी कहा कि उनकी जानकारी में स्कूली बच्चों के लिए मर्चुरी में किसी तरह का प्रशिक्षण कार्यक्रम तय नहीं था।
मर्चुरी में बाहरी लोगों के प्रवेश पर उठे सवाल
पुलिस फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र सिंह के अनुसार मर्चुरी प्रतिबंधित क्षेत्र होता है और वहां प्रवेश के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाना जरूरी है। सामान्य तौर पर पोस्टमार्टम के दौरान ड्यूटी से जुड़े कर्मचारियों के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। विशेष परिस्थितियों में मृतक के स्वजन को भी अनुमति के आधार पर प्रवेश दिया जा सकता है। ऐसे में छात्राओं की मौजूदगी ने अस्पताल की निगरानी और प्रवेश व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूल प्रबंधन ने भी पल्ला झाड़ा
छात्राओं के मर्चुरी पहुंचने को लेकर स्कूल प्रबंधन ने भी किसी तरह की अनुमति देने से इनकार किया है। स्कूल की प्राचार्य का कहना है कि विद्यालय की ओर से किसी भी छात्रा को मर्चुरी में जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। यदि छात्राएं बिना अनुमति के वहां पहुंची हैं तो पूरे मामले की जानकारी जुटाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि छात्राएं मर्चुरी के अंदर किस तरह पहुंचीं और वहां मौजूद रहने के दौरान उनकी निगरानी किसके जिम्मे थी।
जांच के बाद सामने आएगी जिम्मेदारी
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों ने जानकारी जुटाने और स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रतिबंधित क्षेत्र माने जाने वाली मर्चुरी में स्कूली छात्राओं को प्रवेश कैसे मिला। अस्पताल प्रशासन, मेडिकल कॉलेज और स्कूल प्रबंधन के बयानों के बाद अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।










