भोपाल। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में इस तरह के उत्पाद पर रोक लगाए जाने के बाद अब मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। आदेश के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर जांच और सैंपलिंग तेज कर दी है। शुरुआती कार्रवाई में महज 24 घंटे के भीतर पनीर, मावा और घी समेत करीब 8 हजार किलो संदिग्ध सामग्री जब्त की गई है।
100 से ज्यादा पनीर सैंपल जांच के लिए भेजे
प्रतिबंध लागू होने के बाद खाद्य सुरक्षा टीमों ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पनीर और दूध से बने उत्पादों की जांच शुरू की है। अधिकारियों ने अब तक पनीर के 100 से अधिक नमूने लिए हैं। इन सैंपल की प्रयोगशाला जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। अधिकारियों के मुताबिक जांच रिपोर्ट आने में करीब दो सप्ताह का समय लग सकता है। संदिग्ध पाए जाने वाले उत्पादों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दूसरे राज्यों में कार्रवाई के बाद एमपी में बढ़ी निगरानी
एनालॉग पनीर को लेकर खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की ओर से पहले ही राज्यों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। अप्रैल 2026 में भी इस तरह के उत्पाद के संबंध में राज्यों को सार्वजनिक सूचना जारी की गई थी। हालांकि मध्य प्रदेश में कार्रवाई उस समय तेज नहीं हुई। पड़ोसी राज्यों में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने निगरानी बढ़ाई और अब बड़े स्तर पर सैंपलिंग व जब्ती की कार्रवाई की जा रही है।
खुले में बिकने वाले पनीर की पहचान बनी चुनौती
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी परेशानी खुले में बिकने वाले पनीर की पहचान को लेकर है। अधिकारी के अनुसार जब पनीर खुला हुआ बेचा जाता है, तब सामान्य तौर पर दूध से बने पनीर और एनालॉग पनीर में अंतर करना आसान नहीं होता। ऐसे में उत्पाद की पैकेजिंग और लेबलिंग से इसकी पहचान अधिक स्पष्ट हो सकती है। इसी वजह से एनालॉग पनीर को स्पष्ट जानकारी वाले पैकेट में बेचने की व्यवस्था को उपयोगी माना जा रहा है।
होटल और खाद्य कारोबारियों को भी निर्देश
FSSAI के दिशा-निर्देशों में उत्पादन इकाइयों, होटल और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच करने की बात कही गई थी। कारोबारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि एनालॉग पनीर को सामान्य दूध से बने पनीर के नाम पर न बेचा या इस्तेमाल किया जाए। होटल संचालकों को अपने किचन स्टाफ और शेफ को भी इस संबंध में जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ग्राहकों को उत्पाद के बारे में गलत जानकारी न दी जाए।
पहले भी उठ चुके हैं मिलावट को लेकर सवाल
एनालॉग पनीर को लेकर चिंता नई नहीं है। वर्ष 2025 में FSSAI की राष्ट्रीय सलाहकार समिति की बैठक में भी विभिन्न राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इस बात की आशंका जताई थी कि कुछ जगहों पर एनालॉग उत्पाद को सामान्य पनीर बताकर बेचा या होटलों में इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, मध्य प्रदेश में वर्ष 2025-26 के दौरान पनीर के करीब 13 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतर पाए थे। ऐसे में अब प्रदेश में जांच और निगरानी को और सख्त किया गया है।
क्या है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जिसे पारंपरिक दूध से बने पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है और इसकी संरचना सामान्य डेयरी पनीर से अलग हो सकती है। FSSAI की ओर से ऐसे उत्पादों के लिए नियम और लेबलिंग संबंधी प्रावधान निर्धारित हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे सामान्य दूध से बने पनीर के रूप में गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए। वर्तमान कार्रवाई का मुख्य फोकस इसी तरह के उत्पादों की पहचान, सही लेबलिंग और नियमों के पालन पर है।










