इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में 17 अगस्त से न्यायिक मामलों की सुनवाई के लिए नई व्यवस्था लागू हो रही है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति के बाद नया रोस्टर जारी किया गया है, जिसमें अलग-अलग डिवीजन और सिंगल बेंच को विभिन्न श्रेणी के मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। नए रोस्टर के लागू होने के साथ ही इससे पहले जारी संबंधित रोस्टर और आदेशों को प्रतिस्थापित माना जाएगा।
डिवीजन बेंच-1 के सामने आएंगे महत्वपूर्ण मामले
नए रोस्टर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच-1 को कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई सौंपी गई है। इस बेंच के सामने रिट अपील, जनहित याचिकाएं और पर्यावरण से जुड़े मामलों के अलावा कर्मचारी चयन बोर्ड एवं व्यापमं से संबंधित परीक्षा घोटाले के मामले भी रखे जाएंगे। कानून की संवैधानिक वैधता, नेशनल हाईवे निर्माण, सरकारी संस्थानों और स्थानीय निकायों के टेंडर-कॉन्ट्रैक्ट, खनिज एवं खनन से जुड़े विवाद और अवैध हिरासत से संबंधित हेबियस कॉर्पस याचिकाएं भी इसी बेंच के दायरे में रहेंगी।
इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण कानून से जुड़े प्रकरण, नगर निगम और नगरपालिकाओं के अतिक्रमण संबंधी विवाद, सार्वजनिक मार्गों पर अवरोध, स्ट्रीट वेंडर्स से जुड़े मामले और कमर्शियल कोर्ट के आदेशों से संबंधित प्रकरण भी इस बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आएंगे। टैक्स से जुड़े अपील और संदर्भ, आर्बिट्रेशन से संबंधित कंपनी मामले, बार काउंसिल एवं बार एसोसिएशन से जुड़े विवाद, क्रिमिनल कंटेम्प्ट तथा कंटेम्प्ट अपील भी इसी बेंच के जिम्मे रहेंगे।
सिंगल बेंच के लिए भी अलग-अलग जिम्मेदारियां
सिंगल बेंच के स्तर पर भी मामलों का नया विभाजन किया गया है। जस्टिस संदीप एन. भट्ट को कोर्ट रूम नंबर-9 में अधिकांश रिट पिटीशन की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है, हालांकि सर्विस मामलों को इससे अलग रखा गया है। टैक्स संबंधी प्रकरण, मिसलेनियस पिटीशन और बचे हुए सिविल मामलों की सुनवाई भी उनकी बेंच में होगी।
जस्टिस विनय सराफ की बेंच में फर्स्ट अपील, सेकंड अपील, सिविल रिवीजन और मोटर व्हीकल एक्ट से अलग मिसलेनियस अपीलों की सुनवाई होगी। कंपनी अपील तथा आर्बिट्रेशन से जुड़े केस और अपील भी इस बेंच के सामने रखे जाएंगे।
क्रिमिनल केस के लिए अलग बेंच तय
नए रोस्टर में आपराधिक मामलों के लिए भी अलग-अलग बेंच निर्धारित की गई हैं। जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी और जस्टिस गजेंद्र सिंह की सिंगल बेंचों को एमसीआरसी और क्रिमिनल रिट पिटीशन की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की बेंच में सर्विस से जुड़े रिट मामले, सिविल कंटेम्प्ट और कंपनी पिटीशन की सुनवाई होगी।
जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच को क्रिमिनल अपील, क्रिमिनल रिवीजन, मिसलेनियस सिविल केस और मोटर व्हीकल एक्ट से संबंधित मिसलेनियस अपीलों की जिम्मेदारी मिली है। इस तरह नए रोस्टर में मामलों की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग बेंच निर्धारित कर सुनवाई का काम बांटा गया है।
फाइनल हियरिंग के लिए बुधवार और गुरुवार तय
न्यायालय की ओर से जारी व्यवस्था के अनुसार फाइनल हियरिंग वाले मामलों की मासिक सूची तैयार की जाएगी। ऐसे मामलों की सुनवाई बुधवार और गुरुवार को दोपहर 2:30 बजे से होगी। सूची तैयार करते समय पुराने लंबित मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि लंबे समय से चल रहे प्रकरणों की सुनवाई को आगे बढ़ाया जा सके।
नए रोस्टर में यह व्यवस्था भी रखी गई है कि यदि किसी मामले की निर्धारित बेंच उपलब्ध नहीं रहती है तो उसे तय वैकल्पिक बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जा सकेगा। वहीं बेहद जरूरी मामलों के लिए आउट ऑफ टर्न लिस्टिंग का अनुरोध भी किया जा सकता है। इसके लिए उसी दिन या अगले दो कार्य दिवसों के भीतर मेंशनिंग की व्यवस्था रखी गई है।
इस नए रोस्टर के लागू होने के बाद हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में मामलों की सुनवाई निर्धारित श्रेणी और संबंधित बेंच के अधिकार क्षेत्र के अनुसार होगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य मामलों को व्यवस्थित तरीके से संबंधित बेंच के सामने सूचीबद्ध करना है।










