MP Nursing Scam: 600 नर्सिंग कॉलेजों की जांच में खुला बड़ा खेल, गैराज और एटीएम तक में चल रहे थे कॉलेज; हाई कोर्ट की निगरानी में सामने आई पूरी कहानी

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मध्य प्रदेश का नर्सिंग कॉलेज घोटाला केवल फर्जी दस्तावेजों या मान्यता में गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच आगे बढ़ने के साथ शिक्षा व्यवस्था से जुड़े पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हुए। मामला एक शिकायत से शुरू हुआ और हाई कोर्ट की निगरानी में जांच आगे बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में ऐसे कॉलेज सामने आए, जिनमें जरूरी संसाधनों और निर्धारित सुविधाओं की कमी बताई गई। कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मामले में रिकॉर्ड मंगवाने से लेकर जांच की निगरानी तक कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

शिकायत से शुरू हुई जांच ने खोली मान्यता व्यवस्था की पोल

इस मामले की शुरुआत सितंबर 2021 में हुई थी। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से सरकार के सामने शिकायत रखी गई, जिसमें आदिवासी क्षेत्रों में संचालित 55 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता पर सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि कुछ संस्थानों के पास न तो पर्याप्त भवन थे, न जरूरी लैब और न ही अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाएं। शिकायत के बाद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर जनवरी 2022 में मामला हाई कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड मंगवाकर उनकी जांच की प्रक्रिया शुरू कराई।

रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आईं कई गंभीर कमियां

हाई कोर्ट की निगरानी में जब मान्यता से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल हुई तो दस्तावेजी व्यवस्था में भी बड़ी खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 37,759 पृष्ठ रिकॉर्ड में संलग्न नहीं मिले, जबकि लगभग 90 प्रतिशत फाइलों में भवन का स्वीकृत लेआउट मौजूद नहीं था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में एक ही फैकल्टी को एक से अधिक संस्थानों से जुड़ा हुआ दिखाया गया था। इन तथ्यों ने कॉलेजों को मान्यता देने की प्रक्रिया और उसकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए।

करीब 800 कॉलेजों की जांच, 600 पर उठे सवाल

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। जांच के दायरे में करीब 800 नर्सिंग कॉलेज आए। इनमें लगभग 600 संस्थान ऐसे पाए गए, जिन्हें जांच में अपात्र या गंभीर कमियों वाला बताया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ स्थानों पर नर्सिंग कॉलेज गैराज, एटीएम और यहां तक कि स्कूल की इमारतों में संचालित होने की जानकारी सामने आई। इससे यह सवाल और गहरा गया कि बिना पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं के इन संस्थानों को मान्यता किस प्रक्रिया के तहत मिली।

मान्यता के बदले रिश्वत के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल

जांच के दौरान मान्यता प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार का पहलू भी सामने आया। सीबीआई की कार्रवाई में दो इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है। जांच में आरोप सामने आया कि कॉलेजों को मान्यता दिलाने के लिए कथित तौर पर प्रति कॉलेज दो लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक की रिश्वत ली जा रही थी। इस कार्रवाई ने नर्सिंग कॉलेजों की जांच और मान्यता देने वाली व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

नर्सिंग काउंसिल की भूमिका भी जांच के घेरे में

जांच का दायरा बढ़ने के साथ नर्सिंग काउंसिल की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आई। रजिस्ट्रार की नियुक्ति से लेकर कॉलेजों को मान्यता देने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए। एक मामले में भोपाल के करीब 3000 वर्गफीट के मकान में संचालित सविता नर्सिंग कॉलेज को लंबे समय तक मान्यता मिलने का उल्लेख किया गया। इसके अलावा निगरानी के दौरान 49 नए कॉलेजों को दोबारा मान्यता दिए जाने का मामला भी सामने आया, जिसके बाद रजिस्ट्रार सुनीता सिजू के निलंबन की कार्रवाई हुई। निलंबन को कमजोर किए जाने की जानकारी सामने आने पर हाई कोर्ट ने सरकार को भी कड़ी फटकार लगाई।

दिसंबर 2024 में फिर उठा मान्यता प्रक्रिया पर सवाल

दिसंबर 2024 में रजिस्ट्रार अनीता चांद की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। आरोप था कि एक अपात्र कॉलेज को गलत रिपोर्ट के आधार पर मान्यता दी गई। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार और चेयरमैन को हटाने के आदेश दिए। इस पूरे प्रकरण में अदालत की लगातार निगरानी ने न केवल जांच को आगे बढ़ाया, बल्कि नर्सिंग शिक्षा से जुड़े संस्थानों की मान्यता और प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद खामियों को भी सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया।

मध्य प्रदेश का यह नर्सिंग घोटाला इस बात का उदाहरण बन गया कि मान्यता प्रक्रिया में दस्तावेजों और जमीनी हकीकत की जांच कितनी महत्वपूर्ण है। मामले में हाई कोर्ट की निगरानी, सीबीआई जांच और सामने आई अनियमितताओं ने हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे को बेहद गंभीर बना दिया है। आगे की कार्रवाई और जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे तंत्र में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।

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