मध्य प्रदेश में सांपों से निपटने के लिए नई डिजिटल पहल: ‘शिवा एप’ से कुछ ही समय में पहुंचेगा प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यूअर, सर्पदंश की स्थिति में भी मिलेगी जरूरी जानकारी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

वन विभाग तैयार कर रहा नया डिजिटल प्लेटफॉर्म

भोपाल। मध्य प्रदेश में सांपों से जुड़ी घटनाओं के दौरान लोगों को जल्द सहायता उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रहा है। विभाग की ओर से ‘शिवा एप’ विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से घर या आसपास सांप दिखाई देने पर लोग प्रमाणित स्नेक रेस्क्यूअर से संपर्क कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ सांपों को भी सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की व्यवस्था को मजबूत करना है।

एप में प्रदेश के प्रशिक्षित और अधिकृत स्नेक रेस्क्यूअर्स का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। यूजर की लोकेशन के आधार पर उसके आसपास उपलब्ध रेस्क्यूअर की जानकारी मिल सकेगी, जिससे मदद के लिए सही व्यक्ति तक जल्दी पहुंच बनाई जा सके।

GPS से मिलेगी नजदीकी रेस्क्यूअर की जानकारी

‘शिवा एप’ की सबसे अहम सुविधा लोकेशन आधारित सहायता होगी। यदि किसी घर, परिसर या सार्वजनिक स्थान पर सांप दिखाई देता है तो यूजर मोबाइल की GPS लोकेशन के माध्यम से घटना की जानकारी साझा कर सकेगा। इसके बाद सिस्टम आसपास मौजूद प्रमाणित रेस्क्यूअर की पहचान कर उसे सूचना पहुंचाने में मदद करेगा।

वन विभाग का फोकस इस बात पर भी है कि सांपों को पकड़ने का काम केवल प्रशिक्षित और अधिकृत लोगों के जरिए हो। इसके लिए रेस्क्यूअर्स का रिकॉर्ड तैयार करने के साथ उनकी ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग की व्यवस्था भी की जाएगी।

सर्पदंश की स्थिति में भी उपयोगी होगा एप

अगर किसी व्यक्ति को सांप काट लेता है तो एप के माध्यम से शुरुआती स्तर की जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है। इसके साथ ही यूजर को आसपास मौजूद ऐसे अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों की जानकारी और लोकेशन मिल सकेगी, जहां सर्पदंश के इलाज के लिए एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध हो।

ऐसी स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए एप का उद्देश्य केवल स्नेक रेस्क्यू तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सर्पदंश की स्थिति में मरीज को उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में भी मदद करना होगा।

रेस्क्यूअर्स की ट्रेनिंग और लाइसेंस पर जोर

वन विभाग प्रदेश में काम करने वाले स्नेक रेस्क्यूअर्स के लिए प्रशिक्षण व्यवस्था को भी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रेस्क्यूअर्स को नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा और अधिकृत लोगों को एक वर्ष की वैधता वाला लाइसेंस जारी किया जाएगा। लाइसेंस की अवधि पूरी होने के बाद उसका नवीनीकरण कराना जरूरी होगा।

इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि सांपों को रेस्क्यू करने का काम प्रशिक्षित लोगों के हाथों में रहे और आम नागरिक बिना जानकारी के खुद सांप पकड़ने का प्रयास न करें।

वन्यजीव सप्ताह में लॉन्च की तैयारी

वन विभाग की योजना के अनुसार ‘शिवा एप’ को 2 से 8 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले वन्यजीव सप्ताह के दौरान लॉन्च किया जा सकता है। विभाग को उम्मीद है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को सांपों से संबंधित घटनाओं में तुरंत और प्रमाणित सहायता मिल सकेगी।

मध्य प्रदेश में सर्पदंश की घटनाएं लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में हर साल करीब 2,500 से 2,800 लोगों की मौत सर्पदंश के कारण होने का अनुमान है। ऐसे में यदि यह डिजिटल व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आपात स्थिति में रेस्क्यू और चिकित्सा सहायता तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल एप को अंतिम रूप देने और रेस्क्यूअर्स का डेटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। लॉन्च के बाद इसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रशिक्षित रेस्क्यूअर्स और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी कितनी तेजी से उपलब्ध कराई जाती है।

Leave a Comment

और पढ़ें