भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति और स्कूलों के विलय को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में नाराजगी सामने आई है। भोपाल के नीलम पार्क में रविवार को स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और युवा शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज करने के बजाय उनकी सुविधाओं में सुधार करने की मांग उठाई गई।
स्कूल बंद और मर्जर को लेकर विरोध
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी स्कूलों के बंद होने या दूसरे संस्थानों में विलय के बाद कई विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पहले से कहीं अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। ग्रामीण इलाकों में इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है, क्योंकि विद्यार्थियों को कई किलोमीटर दूर स्कूल तक पहुंचना पड़ता है। प्रदर्शन में मांग की गई कि स्थानीय स्तर पर स्कूलों को मजबूत किया जाए, ताकि बच्चों को शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।
शिक्षकों की कमी और स्कूल भवनों की समस्या
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार कई सरकारी स्कूलों में सभी विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इसके अलावा कुछ स्कूल भवनों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई गई। मांग की गई कि पुराने और जर्जर भवनों की समय पर मरम्मत हो तथा विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
TET और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी मांगें
प्रदर्शन में शिक्षक भर्ती और टीईटी से जुड़े नियमों को लेकर भी आवाज उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षकों के पर्याप्त पद भरने, स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने की मांग की। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बेहतर होने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निजी संस्थानों पर निर्भरता कम हो सकती है।
ग्रामीण विद्यार्थियों की परेशानी पर जोर
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की समस्याओं को सामने रखा। उनका कहना था कि आसपास के स्कूल बंद होने पर बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे आने-जाने में समय और खर्च बढ़ता है तथा कुछ विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि स्कूलों से जुड़े फैसले लेते समय विद्यार्थियों की सुविधा और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जाए।
सरकार से क्या मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी स्कूलों के बंद या मर्जर की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने, पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूल भवनों की मरम्मत, जरूरी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और विद्यार्थियों के लिए स्कूल तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।










