मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आक्रोश सामने आया। सागर में विद्यार्थियों ने स्कूल भवन और पेयजल की समस्या को लेकर स्टेट हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, वहीं बड़वानी में छात्राओं ने हॉस्टल और स्कूल प्रबंधन से जुड़ी शिकायतों को लेकर करीब 15 किलोमीटर तक पैदल मार्च किया। दोनों मामलों में प्रशासन को मौके पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत करनी पड़ी और कार्रवाई का भरोसा देना पड़ा।
सागर में स्कूल की समस्याओं को लेकर छात्रों ने रोका स्टेट हाईवे
सागर जिले के देवरीकलां क्षेत्र के रसेना शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों ने लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए स्कूल के पास पर्याप्त भवन उपलब्ध नहीं है और फिलहाल खाद्य विभाग के एक गोदाम में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। स्कूल परिसर में पेयजल की समस्या भी बनी हुई थी। विद्यार्थियों के अनुसार, हैंडपंप पर अतिक्रमण के कारण उन्हें पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
छात्रों का कहना था कि उन्होंने संबंधित समस्याओं को लेकर कई बार अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने महाराजपुर-सहजपुर स्टेट हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों से चर्चा की।
दो घंटे में हटाया गया अतिक्रमण, प्रशासन ने कराया समाधान
मौके पर अधिकारियों ने छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की। प्रशासन ने जेसीबी की मदद से स्कूल के हैंडपंप से जुड़े अतिक्रमण को हटवा दिया। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों द्वारा विरोध भी किया गया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रशासन की कार्रवाई के बाद हाईवे पर चल रहा विरोध समाप्त हुआ और यातायात सामान्य कराया गया। विद्यार्थियों ने स्कूल भवन और अन्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान की भी मांग रखी है।
बड़वानी में छात्राओं ने 15 किलोमीटर तक किया पैदल मार्च
बड़वानी जिले के सेंधवा क्षेत्र के जामली स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राएं भी अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतर आईं। छात्राओं ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं और स्कूल प्रबंधन के व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें सामने रखीं। उनका आरोप था कि उन्हें पढ़ाई के अनुकूल माहौल और जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। छात्राओं ने स्टाफ के कुछ सदस्यों पर अपमानजनक और अनुचित व्यवहार करने के आरोप भी लगाए।
अपनी मांगों को लेकर 150 से अधिक छात्राएं कलेक्ट्रेट की ओर पैदल निकल पड़ीं। करीब 15 किलोमीटर के इस मार्च की जानकारी प्रशासन को मिली तो अधिकारियों ने छात्राओं को रोककर उनसे बातचीत करने की कोशिश की। स्थिति को देखते हुए बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह भी मौके पर पहुंचीं और छात्राओं से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
जांच समिति बनाने का भरोसा, छात्राओं को बस से लौटाया गया
कलेक्टर ने छात्राओं की शिकायतों को सुनने के बाद मामले की जांच के लिए समिति गठित करने और शिकायतें सही पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रशासन की ओर से छात्राओं को उनकी समस्याओं पर उचित कदम उठाने का भरोसा मिलने के बाद प्रदर्शन शांत हुआ। इसके बाद छात्राओं के लिए बसों की व्यवस्था की गई और उन्हें वापस विद्यालय भेजा गया।
दोनों घटनाओं ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, विद्यार्थियों की शिकायतों और प्रशासनिक स्तर पर समय रहते समस्याओं के समाधान की जरूरत को सामने ला दिया है। सागर में छात्रों की पेयजल और भवन संबंधी परेशानी सामने आई, जबकि बड़वानी में छात्राओं ने हॉस्टल व्यवस्था और कथित दुर्व्यवहार को लेकर आवाज उठाई। अब संबंधित मामलों में प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।










