इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना के तहत तैयार की जा रही टीही सुरंग अब केवल रेल आवागमन का हिस्सा नहीं रहेगी, बल्कि इसके प्रवेश द्वारों को स्थानीय इतिहास और संस्कृति से जोड़ने की योजना पर भी काम हो रहा है। पीथमपुर क्षेत्र में स्थित यह सुरंग धार जिले की सीमा में आती है। इसी वजह से टीही की ओर बने प्रवेश द्वार को धार की प्रसिद्ध भोजशाला की स्थापत्य शैली से प्रेरित रूप देने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, इसका अंतिम डिजाइन अभी तय नहीं हुआ है और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
टीही सुरंग को दिया जाएगा आकर्षक स्वरूप
रेलवे की योजना के अनुसार सुरंग के दोनों सिरों पर ऐसे स्ट्रक्चर तैयार किए जा सकते हैं, जिनमें क्षेत्र की वास्तुकला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत की झलक दिखाई दे। स्थानीय कला, पारंपरिक डिजाइन और क्षेत्रीय प्रतीकों को इसमें शामिल करने के विकल्पों पर चर्चा चल रही है। इसका उद्देश्य सुरंग को केवल तकनीकी ढांचे के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान से जुड़े आकर्षक प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करना है।
करीब 3 किलोमीटर लंबी है सुरंग
टीही सुरंग की लंबाई लगभग 2.95 किलोमीटर यानी 2957 मीटर है। यह इंदौर-दाहोद रेल परियोजना की महत्वपूर्ण संरचनाओं में शामिल है। सुरंग जमीन की सतह से करीब 20 मीटर नीचे बनाई जा रही है और इसकी चौड़ाई तथा ऊंचाई लगभग 8-8 मीटर है। सुरंग के दोनों ओर अलग-अलग हिस्सों में काम पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है। पीथमपुर और टीही की तरफ छोड़े गए हिस्सों में भी निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।
अंदर ट्रैक और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम जारी
सुरंग के भीतर रेलवे ट्रैक से जुड़े कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने के साथ इलेक्ट्रिफिकेशन और जल निकासी व्यवस्था पर भी काम चल रहा है। यात्रियों और रेल संचालन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरंग में एग्जास्ट फैन लगाने की व्यवस्था की गई है। कुल 12 एग्जास्ट फैन लगाए जाने हैं, जिनमें से चार की स्थापना पूरी होने की जानकारी सामने आई है।
अधूरे हिस्सों को जल्द पूरा करने का लक्ष्य
सुरंग के दोनों छोर पर पहले निर्माण सामग्री और अन्य गतिविधियों के लिए कुछ हिस्सा छोड़ा गया था। पीथमपुर की तरफ लगभग 170 मीटर और टीही की तरफ 50 मीटर से अधिक हिस्से में काम बाकी था। अब इन हिस्सों में भी निर्माण शुरू कर दिया गया है। सुरक्षा के लिए दोनों छोर के बाहर लोहे के सरियों से दीवार तैयार की जा रही है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इन शेष हिस्सों को अगले कुछ महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कई चुनौतियों के बाद फिर शुरू हुआ था निर्माण
टीही सुरंग का निर्माण कार्य पहले शुरू होने के बाद कुछ समय के लिए रुक गया था। वर्ष 2020 में परियोजना से संबंधित काम प्रभावित होने के कारण सुरंग का निर्माण भी ठप रहा और इस दौरान अधूरे हिस्से में बारिश का पानी जमा हो गया था। इसके बाद जून 2023 में निर्माण दोबारा शुरू किया गया। काम फिर शुरू होने पर सुरंग से पानी निकालना बड़ी चुनौती रही। इसके बाद ब्लास्टिंग और अन्य निर्माण गतिविधियों के जरिए शेष हिस्से को पूरा करने की दिशा में काम आगे बढ़ा।
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के लिए अहम कड़ी
टीही सुरंग इंदौर-दाहोद रेल परियोजना में इंदौर से जुड़े हिस्से की पहली प्रमुख रेल सुरंग है। पूरी नई रेल लाइन की लंबाई करीब 200.97 किलोमीटर बताई गई है, जबकि परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1700 करोड़ रुपये के आसपास है। सुरंग का निर्माण पूरा होने और बाकी रेल ढांचे के तैयार होने के बाद यह क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रवेश द्वार को स्थानीय विरासत से जोड़ने की योजना पूरी होती है तो यह सुरंग यात्रियों के लिए तकनीकी सुविधा के साथ-साथ धार की ऐतिहासिक पहचान की एक झलक भी पेश करेगी।










