MP Pension Update: मध्य प्रदेश के पेंशनभोगियों को बड़ी राहत, अब तय समय में निपटेंगे पेंशन केस; अधिकारियों की लापरवाही पर होगी कार्रवाई

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मध्य प्रदेश में सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पेंशन से जुड़े मामलों को लंबे समय तक लंबित रखने की समस्या को कम करने के लिए राज्य सरकार ने इनके निराकरण की समय-सीमा निर्धारित कर दी है। अब पेंशन प्रकरणों को अलग-अलग स्तर पर तय किए गए कार्य दिवसों के भीतर पूरा करना होगा। निर्धारित समय में काम नहीं करने पर संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जा सकती है।

राज्य केंद्रीकृत पेंशन सेल के जरिए होगी प्रक्रिया तेज

मध्य प्रदेश के पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा संचालनालय ने राज्य केंद्रीकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल यानी एससीपीपीसी के तहत पेंशन मामलों के निपटारे को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। इस व्यवस्था में पेंशन प्रकरण अलग-अलग चरणों से होकर गुजरते हैं, जिनमें क्रिएटर, वेरीफायर और एप्रूवर की भूमिका होती है। अब प्रत्येक स्तर पर काम पूरा करने के लिए अधिकतम समय निर्धारित किया गया है, जिससे पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को रोका जा सके।

संभाग और जिला कार्यालयों में लंबित मामलों पर नजर

विभागीय समीक्षा के दौरान यह सामने आया था कि कई संभागीय और जिला कार्यालयों में पेंशन से जुड़े प्रकरण निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद काफी समय तक लंबित रह जाते हैं। क्रिएटर, वेरीफायर और एप्रूवर स्तर पर फाइलों के निपटारे में देरी के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपने पेंशन संबंधी काम के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी स्थिति को देखते हुए अब अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए समय-सीमा स्पष्ट कर दी गई है।

नए और पुनरीक्षित पेंशन मामलों के लिए अलग समय-सीमा

निर्देश के अनुसार नए पेंशन प्रकरणों में क्रिएटर को अधिकतम 5 कार्य दिवस, वेरीफायर को 5 कार्य दिवस और एप्रूवर को भी 5 कार्य दिवस में अपनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वहीं पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों के लिए क्रिएटर स्तर पर 4 कार्य दिवस तथा वेरीफायर और एप्रूवर स्तर पर 3-3 कार्य दिवस की सीमा तय की गई है। वेतन निर्धारण से संबंधित मामलों में क्रिएटर को 5 कार्य दिवस, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को 3-3 कार्य दिवस में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

जल्द रिटायर होने वाले कर्मचारियों के मामलों पर भी फोकस

सरकार ने उन शासकीय कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं, जिनकी सेवानिवृत्ति आने वाले महीनों में होने वाली है। ऐसे कर्मचारियों के पेंशन मामलों की स्वीकृति वित्त विभाग के निर्धारित नियमों के अनुसार समय पर पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी के रिटायर होने के बाद पेंशन संबंधी लाभ प्राप्त करने में अनावश्यक देरी न हो।

समय-सीमा का पालन नहीं करने पर होगी जवाबदेही

नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पेंशन प्रकरणों के निपटारे को तेज और व्यवस्थित बनाना है। संबंधित कार्यालयों को तय समय के भीतर अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी होगी। यदि किसी स्तर पर बिना उचित कारण के फाइल लंबित रहती है या प्रक्रिया में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय की जा सकती है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन संबंधी मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है।

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