भोपाल में सांस की बीमारी के 5 वायरस सामने आए, बच्चों में RSV-एडेनोवायरस और बड़ों में फ्लू-कोरोना का ज्यादा असर

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सर्दी-खांसी और बुखार को हर बार कोरोना न समझें, भोपाल की वायरोलॉजी लैब की स्टडी में अलग-अलग आयु वर्ग में मिले अलग वायरस

भोपाल। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, खांसी, बुखार और सांस से जुड़ी समस्याओं के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे लक्षणों का कारण केवल कोरोना वायरस ही हो, यह जरूरी नहीं है। भोपाल में किए गए एक अध्ययन में सांस संबंधी संक्रमण से जुड़े कई अलग-अलग वायरस की मौजूदगी सामने आई है। शोध में बच्चों और वयस्कों में संक्रमण के पैटर्न में भी अंतर देखने को मिला।

अध्ययन में इन 5 वायरस की हुई पहचान

गांधी मेडिकल कॉलेज की स्टेट वायरोलॉजी लैब में सांस संबंधी संक्रमण के लक्षण वाले मरीजों के नमूनों की जांच की गई। जांच के दौरान SARS-CoV-2, एडेनोवायरस, RSV, इन्फ्लुएंजा-A और इन्फ्लुएंजा-B की पहचान हुई। शोधकर्ताओं ने मरीजों के नाक और गले से लिए गए स्वैब की आधुनिक प्रयोगशाला जांच के जरिए वायरस का पता लगाया। अध्ययन से यह संकेत मिला कि एक जैसे दिखाई देने वाले लक्षणों के पीछे अलग-अलग वायरस हो सकते हैं।

बच्चों में RSV और एडेनोवायरस ज्यादा

अध्ययन में बच्चों के बीच RSV और एडेनोवायरस का संक्रमण अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। RSV खासतौर पर छोटे बच्चों में सांस से जुड़ी बीमारी का कारण बन सकता है, जबकि एडेनोवायरस से सर्दी, खांसी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। इसलिए छोटे बच्चों में लगातार बने रहने वाले या बढ़ते लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

वयस्कों में फ्लू और कोरोना का असर

वयस्क मरीजों में इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू और SARS-CoV-2 की मौजूदगी अधिक दर्ज की गई। इससे साफ होता है कि मौसम में होने वाले सामान्य सर्दी-बुखार के लक्षणों के पीछे कई तरह के संक्रमण हो सकते हैं। केवल लक्षण देखकर यह तय करना मुश्किल होता है कि मरीज को कौन-सा वायरस प्रभावित कर रहा है।

कुछ मरीजों में एक से ज्यादा वायरस

अध्ययन में ऐसे मरीज भी सामने आए जिनमें एक साथ एक से अधिक वायरस की मौजूदगी पाई गई। इस तरह के मामले गंभीर सांस संबंधी संक्रमण वाले मरीजों में ज्यादा देखने को मिले। शोध के अनुसार, कुछ गंभीर मामलों में एक से ज्यादा वायरस मिलकर संक्रमण की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी की जरूरत

सर्दी, खांसी, बुखार या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण कई वायरल संक्रमणों में समान हो सकते हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण गंभीर होने का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। ऐसे में लक्षण ज्यादा बढ़ने, लंबे समय तक बने रहने या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

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