MP में वन्यजीवों के इलाज को मिलेगी नई सुविधा: बांधवगढ़ के पास बनेगा आधुनिक रेस्क्यू सेंटर और चिड़ियाघर, 40 हेक्टेयर जमीन चिन्हित

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मध्य प्रदेश में घायल, बीमार और उम्रदराज वन्यजीवों के उपचार और संरक्षण के लिए बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास एक आधुनिक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर-कम-चिड़ियाघर विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए उमरिया जिले के नौरोजाबाद क्षेत्र में करीब 40 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। फिलहाल परियोजना की विस्तृत डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

घायल और बुजुर्ग वन्यजीवों को मिलेगा बेहतर इलाज

इस प्रस्तावित केंद्र का उद्देश्य ऐसे वन्यजीवों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, जो जंगल में घायल हो जाते हैं, बीमार पड़ते हैं या उम्र अधिक होने के कारण सामान्य रूप से जीवित रहने में कठिनाई महसूस करते हैं। यहां उपचार के साथ-साथ जरूरत के अनुसार वन्यजीवों के पुनर्वास और संरक्षण की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। परियोजना से वन्यजीवों की देखभाल बेहतर होने के साथ क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

नौरोजाबाद में 40 हेक्टेयर जमीन पर प्रस्तावित है परियोजना

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नजदीक होने के कारण नौरोजाबाद को इस परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान माना गया है। प्रस्तावित परिसर में रेस्क्यू और उपचार से जुड़ी सुविधाओं के साथ वन्यजीवों के पुनर्वास की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। अभी परियोजना का विस्तृत स्वरूप डीपीआर में तय किया जा रहा है, जिसके बाद निर्माण और अन्य प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच अहम पहल

पिछले कुछ वर्षों में बाघों समेत कई वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। वहीं जंगलों के क्षेत्र में बदलाव, वनों की कटाई और बढ़ते शहरीकरण के कारण वन्यजीवों का इंसानी आबादी के करीब पहुंचना भी एक चुनौती बन रहा है। ऐसे मामलों में घायल या कमजोर वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर उनका उपचार और पुनर्वास करना जरूरी हो जाता है। प्रस्तावित केंद्र इसी जरूरत को ध्यान में रखकर विकसित किया जाना है।

फरवरी 2025 में मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा

इस परियोजना की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फरवरी 2025 में नौरोजाबाद क्षेत्र के दौरे के दौरान की थी। उन्होंने कहा था कि बांधवगढ़ क्षेत्र में बीमार या बुजुर्ग बाघों और अन्य वन्यजीवों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए टाइगर रिजर्व से बाहर रेस्क्यू सेंटर और चिड़ियाघर विकसित किया जाएगा। अब इस योजना को आगे बढ़ाते हुए जमीन चिह्नित करने और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

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