भोपाल से पूरे मध्य प्रदेश तक जलस्रोतों की सुरक्षा पर बड़ा आदेश
भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश के तालाबों, झीलों और वेटलैंड की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश में चिह्नित 13,565 वेटलैंड का तय समयसीमा में जमीन पर सीमांकन करने के निर्देश दिए गए हैं। इन जलस्रोतों की सीमाएं स्पष्ट करने के लिए चिन्ह और मुनार लगाए जाएंगे, जिससे भविष्य में अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेटलैंड क्षेत्रों में अतिक्रमण, अनधिकृत निर्माण, कचरा डालना, मिट्टी या रेत भराव और बिना उपचारित सीवेज अथवा औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने जैसी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। संबंधित विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
बड़े तालाब का फिर होगा वैज्ञानिक सीमांकन, भदभदा गेट खोलने पर रोक
भोपाल के बड़े तालाब को लेकर भी एनजीटी ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। तालाब की वास्तविक सीमा और फुल टैंक लेवल (FTL) तय करने के लिए नए सिरे से वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, जियो-टैगिंग और ग्राउंड सर्वे जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
जब तक सीमांकन और जलस्तर से जुड़ी स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक भदभदा डैम के गेट खोलने पर रोक रहेगी। इसके लिए विशेषज्ञ समिति को सीमित समय में अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। बड़े और छोटे तालाब के आसपास निर्माण गतिविधियों को लेकर भी सुरक्षा दायरा तय किया गया है।
अवैध कब्जों और निर्माणों पर होगी कार्रवाई
एनजीटी के निर्देशों के अनुसार, वेटलैंड और सरकारी जलस्रोतों पर पहले से मौजूद अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई तेज की जाएगी। अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि अतिक्रमण की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
यदि किसी मामले में प्रशासनिक लापरवाही या अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। विभिन्न विभागों को आपसी समन्वय के साथ जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए काम करना होगा।
झीलों में गिरने वाले नालों पर कैमरों और डिजिटल मीटर से निगरानी
बड़ी और छोटी झील में पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए एनजीटी ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। सीवेज या अन्य अपशिष्ट पहुंचाने वाले प्रमुख नालों पर कैमरे और डिजिटल फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि झीलों में कितना पानी और किस प्रकार का अपशिष्ट पहुंच रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सीवेज उत्पादन, उसके उपचार और झीलों तक पहुंचने वाले पानी की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी। बिना उपचारित गंदा पानी या औद्योगिक अपशिष्ट जलस्रोतों में छोड़े जाने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी वसूली जा सकती है।
2.25 हेक्टेयर से बड़े जलस्रोत आएंगे वेटलैंड नियमों के दायरे में
एनजीटी ने साफ किया है कि किसी जल निकाय को डैम या रिजर्वायर का नाम देने मात्र से वह वेटलैंड नियमों से बाहर नहीं हो जाएगा। 2.25 हेक्टेयर से बड़े जलस्रोतों को वेटलैंड संरक्षण के दायरे में लाया जाएगा।
जिलों में वेटलैंड संरक्षण समितियों को जलस्रोतों की पहचान, निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही आम लोगों के लिए शिकायत दर्ज कराने और वेटलैंड से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।










