भोपाल। आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अब जर्जर और असुरक्षित इमारतों का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया है। दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए PG हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने असुरक्षित भवनों के मामले को गंभीरता से लिया है। इसी क्रम में 10 सितंबर को मामले की सुनवाई प्रस्तावित है। अदालत की चिंता केवल दिल्ली तक सीमित रहने के संकेतों के बीच भोपाल में आवासीय भवनों में चल रहे PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
भोपाल में सैकड़ों PG-हॉस्टल, पंजीयन को लेकर सवाल
भोपाल के MP नगर, रचना नगर, गौतम नगर सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में PG और हॉस्टल संचालित हो रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शहर में 200 से अधिक PG-हॉस्टल होने की बात सामने आई है, लेकिन इनमें से केवल करीब 63 के ही प्रशासन के पास पंजीकृत होने की जानकारी है। बाकी करीब 140 संस्थानों के पंजीयन, संचालन की अनुमति और अन्य जरूरी औपचारिकताओं की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इन स्थानों पर बड़ी संख्या में दूसरे जिलों और शहरों से आए विद्यार्थी रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कुछ जगहों पर निर्धारित क्षमता से ज्यादा विद्यार्थियों को रखने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
सिर्फ पंजीयन नहीं, फायर सेफ्टी और भवन की मजबूती भी जरूरी
PG और हॉस्टल को लेकर चिंता केवल उनके पंजीकरण तक सीमित नहीं है। जिस इमारत में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रह रहे हैं, वहां आग से बचाव के इंतजाम, बिजली की सुरक्षा, आपात स्थिति में बाहर निकलने के रास्ते और भवन की संरचनात्मक मजबूती की जांच भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी भवन में क्षमता से अधिक लोगों को रखा जा रहा है या आपात निकासी के पर्याप्त रास्ते नहीं हैं, तो दुर्घटना की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है। फिलहाल भोपाल के सभी ऐसे PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कोई स्पष्ट सार्वजनिक आंकड़ा सामने नहीं है।
नगर निगम ने हजारों जर्जर भवनों की पहचान की थी
भोपाल में जर्जर भवनों की समस्या भी काफी बड़ी है। मानसून से पहले नगर निगम ने शहर में 3,435 जर्जर, अति-जर्जर और खतरनाक भवनों को चिन्हित किया था। इनमें 2,464 सरकारी और 971 निजी भवन बताए गए थे। इनमें से करीब 740 सरकारी भवनों को अति-जर्जर श्रेणी में रखा गया था। ऐशबाग के जनता क्वार्टर में करीब 600 मकान तथा ओल्ड सुभाष नगर और गौतम नगर में 327 जर्जर भवनों का भी उल्लेख किया गया है।
दिल्ली की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट में उठा मुद्दा
आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुई PG दुर्घटना का उल्लेख भी सुप्रीम कोर्ट के सामने किया गया। एमिकस क्यूरे सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा ने घटना का हवाला देते हुए असुरक्षित और नियमों के विपरीत संचालित भवनों का मुद्दा उठाया। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने संकेत दिया कि असुरक्षित और अवैध इमारतों से जुड़ा विषय केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखा जाएगा। ऐसे में देश के दूसरे शहरों में भी इस तरह के भवनों और उनमें संचालित गतिविधियों की स्थिति पर ध्यान बढ़ने की संभावना है।
मध्य प्रदेश से मांगी गई मूल फाइल अभी अदालत तक नहीं पहुंची
मध्य प्रदेश में आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कार्रवाई के बीच 2 अगस्त को राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक समिति का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति के गठन को प्रथम दृष्टया अवमाननापूर्ण मानते हुए इससे संबंधित मूल फाइल और रिकॉर्ड मांगे थे। जानकारी के मुताबिक अदालत की ओर से मांगी गई फाइल के संबंध में पत्र 31 अगस्त को स्पीड पोस्ट के जरिए डिलीवर हो चुका है, लेकिन मूल रिकॉर्ड अभी तक सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने की जानकारी नहीं है।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि असुरक्षित और नियमों के विपरीत संचालित भवनों को लेकर अदालत क्या दिशा-निर्देश देती है और इनका असर भोपाल जैसे शहरों में संचालित PG, हॉस्टल तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर किस तरह पड़ता है।










