भोपाल। मध्य प्रदेश में दूध के बजाय वनस्पति तेल और अन्य खाद्य सामग्री से तैयार किए जाने वाले एनालॉग पनीर को लेकर सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। विभाग की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि कहीं एनालॉग पनीर को असली दूध से तैयार पनीर बताकर बाजार, होटल और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल या बिक्री तो नहीं की जा रही है।
दूसरे राज्यों की कार्रवाई के बाद मध्य प्रदेश में तैयारी
एनालॉग पनीर पर कार्रवाई को लेकर मध्य प्रदेश ने पड़ोसी राज्यों में उठाए गए कदमों का भी अध्ययन किया है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात में इस तरह के उत्पादों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई शुरू की जा चुकी है और कुछ स्थानों पर ऐसे उत्पादों को जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। गुजरात में कार्रवाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए टास्क फोर्स बनाए जाने की बात भी सामने आई है। इसी के बाद मध्य प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इन राज्यों में लिए गए फैसलों के कारणों और प्रक्रिया की जानकारी जुटाई है।
दूध के पनीर के नाम पर बिक्री बनी मुख्य चिंता
विभाग के सामने सबसे बड़ी चिंता उत्पाद की पहचान और उसकी बिक्री को लेकर है। आशंका जताई जा रही है कि वनस्पति तेल से तैयार एनालॉग पनीर को यदि उपभोक्ताओं के सामने दूध से बने पनीर के रूप में पेश किया जाता है, तो इससे खाद्य उत्पाद की सही जानकारी उपभोक्ता तक नहीं पहुंचती। विभाग को इस संबंध में शिकायतें मिलने की बात भी सामने आई है। इसी वजह से ऐसे उत्पादों की बिक्री और उपयोग को लेकर नियमों के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
प्रस्ताव पर मंत्री की सहमति के बाद होगा फैसला
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव को आगे निर्णय के लिए रखा जाएगा। प्रस्ताव पर मंत्री की सहमति मिलने के बाद मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य सुरक्षा आयुक्त को खाद्य उत्पादों पर आवश्यक परिस्थितियों में प्रतिबंधात्मक कदम उठाने का अधिकार है। अब विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होने की उम्मीद है।
उपभोक्ताओं की जानकारी और खाद्य सुरक्षा पर जोर
एनालॉग पनीर को लेकर प्रस्तावित कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बाजार में बिकने वाले पनीर की गुणवत्ता और उसकी सही पहचान सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। यदि किसी उत्पाद को दूध से बने पनीर के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जाता है, तो ऐसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है। मध्य प्रदेश में प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय के बाद खाद्य प्रतिष्ठानों और बाजारों में जांच की दिशा भी स्पष्ट होगी।










