जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कर्मचारियों की क्रमोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि पात्र कर्मचारी को तृतीय और चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ उसकी वास्तविक पात्रता की तारीख से दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को इस मामले में निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के लिए 90 दिन की समयसीमा दी है। आदेश का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो लंबी सेवा पूरी करने के बावजूद क्रमोन्नत वेतनमान के लाभ से वंचित रहे हैं।
40 वर्ष की सेवा के बाद भी नहीं मिला लाभ
मामला छतरपुर जिले के सहायक शिक्षक राजकुमार पटेरिया से जुड़ा है, जो 30 नवंबर 2022 को सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर यह मुद्दा उठाया कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज चंसौरिया ने कोर्ट के समक्ष पक्ष रखते हुए संबंधित शासन आदेशों की उन शर्तों को चुनौती दी, जिनके कारण लाभ की प्रभावी तारीख बाद की मानी जा रही थी।
नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना का निर्देश
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि क्रमोन्नत वेतनमान के लिए सेवा अवधि की गणना नियुक्ति की तारीख से की जानी चाहिए। आदेश के अनुसार, निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने पर तृतीय और चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ कर्मचारी की पात्रता के आधार पर तय किया जाना चाहिए। यानी केवल बाद में जारी किए गए शासन परिपत्रों की तारीख को आधार बनाकर पहले से पात्र कर्मचारी को लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
पुराने हाई कोर्ट फैसले का भी दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व में दिए गए एक अन्य फैसले का भी उल्लेख किया गया। इसमें कृष्ण वल्लभ मकवाना बनाम मध्य प्रदेश शासन मामले में हाई कोर्ट ने क्रमोन्नति से संबंधित इसी तरह के मुद्दे पर निर्णय दिया था। उस मामले में भी अदालत ने माना था कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारी को उसकी पात्रता के अनुसार क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए, भले ही वह संबंधित शासन परिपत्र जारी होने से पहले सेवानिवृत्त हो चुका हो।
90 दिन में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजकुमार पटेरिया के मामले में चतुर्थ क्रमोन्नति के लाभ पर उनकी पात्रता की तारीख से विचार किया जाए। अदालत ने संबंधित प्रक्रिया को 90 दिनों के भीतर पूरा करने को कहा है। साथ ही क्रमोन्नति के कारण वेतन निर्धारण और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी नियमानुसार देखने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष: हाई कोर्ट के इस आदेश से यह संदेश स्पष्ट है कि लंबे समय तक सेवा पूरी करने के बाद क्रमोन्नति के लिए पात्र कर्मचारियों के मामलों में उनकी वास्तविक पात्रता की तारीख महत्वपूर्ण होगी। बाद में जारी शासन आदेश या परिपत्र के आधार पर पुराने पात्र मामलों के लाभ को रोकने पर अदालत ने सवाल उठाया है।










