मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के बढ़ते मामले पर हाई कोर्ट सख्त, रोजाना 130 से अधिक गुमशुदगी का दावा

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इंदौर। मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के लगातार लापता होने के मामलों को लेकर हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। इस मुद्दे से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में दावा किया गया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चियां लापता हो रही हैं, लेकिन उनकी तलाश और मामलों की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जनहित याचिका में उठाया गया गंभीर मुद्दा

यह जनहित याचिका अभिजीत पांडेय की ओर से अधिवक्ता शुभम मांडिल के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि मामला किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, जीवन तथा गरिमा से जुड़े व्यापक सवाल खड़े करता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक लापता होने वाले लोगों के मामलों में मानव तस्करी, शोषण और अन्य गंभीर अपराधों की आशंका हो सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में समय पर तलाश और प्रभावी जांच बेहद जरूरी है।

आंकड़ों में सामने आई बड़ी तस्वीर

याचिका में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के लापता होने की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का दावा किया गया है। याचिका में बताया गया कि वर्ष 2023 में महिलाओं के लापता होने का आंकड़ा करीब 74 हजार तक पहुंच गया था। वहीं बच्चियों की गुमशुदगी का आंकड़ा भी हजारों में बताया गया है। याचिकाकर्ता ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि वर्ष 2020 से 28 जनवरी 2026 तक प्रदेश से 2,74,311 महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं। इस आंकड़े के आधार पर औसतन प्रतिदिन करीब 130 महिलाओं और बच्चियों के लापता होने का दावा किया गया है।

आंकड़े सार्वजनिक करने और निगरानी पर सवाल

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि लापता महिलाओं और बच्चों से संबंधित ताजा आंकड़े पर्याप्त रूप से सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से वर्ष 2023 के बाद के आंकड़ों की उपलब्धता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से हाल के वर्षों में लापता हुए लोगों की संख्या और उनके मामलों में हुई कार्रवाई की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है।

आरटीआई से भी मांगी गई थी जानकारी

याचिकाकर्ता ने लापता महिलाओं और बच्चों से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए जिला अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से जानकारी मांगी थी। याचिका के अनुसार वहां से अपेक्षित और संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद मामले को हाई कोर्ट के सामने रखा गया।

सरकार से विस्तृत रिपोर्ट की मांग

जनहित याचिका में मांग की गई है कि राज्य सरकार से वर्ष 2021 से अब तक महिलाओं और बच्चों की गुमशुदगी, उनकी बरामदगी, लंबित मामलों और जांच के दौरान उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मंगाई जाए। इसके साथ ही इंदौर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे मामलों की निगरानी और जांच के लिए विशेषज्ञ व्यवस्था विकसित करने की मांग भी की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिसिंग पर्सन मामलों को लेकर जारी दिशा-निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग भी उठाई गई है।

फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। आगे की सुनवाई में सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले आंकड़ों और कार्रवाई की जानकारी से यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश में गुमशुदगी के मामलों को रोकने और लापता लोगों की तलाश के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

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