इंदौर। इंदौर नगर निगम से जुड़े करीब 103 करोड़ रुपये के कथित फर्जी बिल मामले में विशेष न्यायालय ने इंजीनियर अभय राठौर और ठेकेदार राहुल बड़ेरा को फिलहाल राहत नहीं दी है। दोनों आरोपितों की ओर से दायर जमानत याचिकाओं को अदालत ने खारिज कर दिया। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कार्रवाई की जा रही है और जांच के बाद आरोपितों की कुछ संपत्तियों को भी अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अदालत ने क्यों खारिज की जमानत
जमानत के दौरान आरोपितों की ओर से दलील दी गई कि वे जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ईडी की कार्रवाई एकतरफा है। दूसरी ओर, जांच एजेंसी की ओर से मामले की गंभीरता को अदालत के सामने रखा गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायालय ने जमानत आवेदनों को स्वीकार नहीं किया।
103 करोड़ के कथित फर्जी भुगतान का मामला
जांच के अनुसार, मामले में फर्जी टेंडर, वर्क आर्डर और बिल तैयार किए जाने का आरोप है। कथित तौर पर कागजों में ऐसे कार्यों को पूरा दिखाया गया, जिनमें से कुछ काम वास्तव में किए ही नहीं गए थे। कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए जो पहले ही पूरे हो चुके थे, लेकिन उनके नाम पर दोबारा भुगतान प्राप्त करने का आरोप है। इसी प्रक्रिया के जरिए नगर निगम से 103 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हासिल किए जाने की बात जांच में सामने आई।
ईडी की कार्रवाई और आगे की जांच
नगर निगम के फर्जी बिल मामले में ईडी ने जून 2024 में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। जांच आगे बढ़ने के बाद एजेंसी ने जून 2026 के पहले सप्ताह में संबंधित आरोपितों को गिरफ्तार किया। मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। जांच एजेंसी की ओर से आरोपितों से जुड़ी संपत्तियों को अटैच किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
अब जेल में ही रहेंगे दोनों आरोपित
विशेष न्यायालय से जमानत नहीं मिलने के बाद इंजीनियर अभय राठौर और ठेकेदार राहुल बड़ेरा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर प्रकरण आगे बढ़ेगा। अदालत का यह फैसला केवल जमानत से संबंधित है; आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।










