इंदौर। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के अहम हिस्से टिही की 2.95 किलोमीटर लंबी सुरंग में निर्माण कार्य अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। टिही से पीथमपुर की दिशा में सुरंग के भीतर आधुनिक बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो चुका है। इस तकनीक में पारंपरिक रेल पटरियों की तरह पत्थर की गिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि मजबूत कंक्रीट बेस पर ट्रैक तैयार किया जाता है। परियोजना से जुड़े कार्यों में ट्रैक के साथ सुरक्षा, वेंटिलेशन, ड्रेनेज और विद्युतीकरण की तैयारियां भी समानांतर रूप से चल रही हैं।
सुरंग में आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम
सामान्य रेल ट्रैक में पटरियों के नीचे गिट्टी की परत होती है, लेकिन बैलास्टलेस तकनीक में कंक्रीट का मजबूत आधार तैयार करके उस पर रेल लाइन स्थापित की जाती है। सुरंग के भीतर इस व्यवस्था से गिट्टी के खिसकने और उसके रखरखाव से जुड़ी परेशानियां कम होने की उम्मीद है। इससे ट्रैक को स्थिर रखने और लंबे समय तक संचालन के लिए उपयुक्त आधार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
पहियों की सुरक्षा के लिए ड्रीलमेन गार्ड
ट्रैक के साथ यात्रियों और ट्रेन संचालन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्रीलमेन गार्ड भी लगाया जा रहा है। यह व्यवस्था पटरियों के बीच करीब 12 मिलीमीटर नीचे स्थापित की जा रही है। इसका उद्देश्य पहिए में किसी तरह की खराबी आने पर उसे अनियंत्रित तरीके से घूमने या ट्रैक के किनारे की तरफ खिसकने से रोकने में मदद करना है। इससे ट्रेन की स्थिरता बनाए रखने और पहिए को सुरंग की दीवार से टकराने की आशंका कम करने में सहायता मिलेगी।
सुरंग में वेंटिलेशन और बिजली की तैयारी
सुरंग के अंदर हवा के प्रवाह को बेहतर बनाए रखने के लिए कुल 12 एग्जास्ट फैन लगाने की योजना है, जिनमें से चार लगाए जा चुके हैं। प्रत्येक फैन की क्षमता 37.5 किलोवाट बताई गई है। इनका इस्तेमाल सुरंग के भीतर जमा धुआं और प्रदूषित हवा बाहर निकालने तथा ताजी हवा के प्रवाह में मदद के लिए किया जाएगा। इसके अलावा ट्रेन के विद्युतीकरण के लिए सुरंग के ऊपरी हिस्से में हर 31.5 मीटर पर कैंटिलीवर लगाए जा रहे हैं। आगे इन्हीं के माध्यम से ओवरहेड इक्विपमेंट लगाया जाएगा।
लाइनिंग और पानी की निकासी का काम
टनल की लगभग 2957 मीटर लंबी संरचना में लाइनिंग का काम भी जारी है। खुदाई के बाद सुरंग की मजबूती के लिए यह महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। निर्माण पूरा होने वाले हिस्सों को ट्रैक बिछाने के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि अन्य हिस्सों में फिनिशिंग का काम चल रहा है। सुरंग के अंदर हर 50 मीटर पर ड्रेनेज चैंबर बनाए गए हैं। दोनों तरफ साइड ड्रेन और इनवर्ट ड्रेन का अधिकांश काम पूरा होने की जानकारी दी गई है, जिससे पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
आपात स्थिति के लिए भी इंतजाम
सुरंग को सामान्य रेल संचालन के साथ आपात परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए रिफ्यूज निच, रेस्क्यू शाफ्ट और वेंटिलेशन डक्ट जैसी व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य किसी आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना और बचाव दल की पहुंच को आसान बनाना है। सुरंग में निगरानी के लिए कुल 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की योजना है।
अक्टूबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य
रेलवे के निर्माण विभाग ने सुरंग का काम अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रतिदिन के कार्यों की योजना बनाकर अलग-अलग हिस्सों की समय-सीमा तय की जा रही है। हालांकि, मौजूदा काम की गति को देखते हुए परियोजना से जुड़े स्तर पर दिसंबर से पहले काम पूरा होने को लेकर चुनौती बनी हुई है। अब ट्रैक, विद्युतीकरण, सुरक्षा और अन्य निर्माण कार्यों को एक साथ गति देने पर जोर दिया जा रहा है।










