बैंक सत्यापन के दौरान सामने आया बड़ा खुलासा
मध्य प्रदेश में सरकारी परियोजनाओं से जुड़े एक बड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (MP-UDC) ने एक निजी कंपनी को करोड़ों रुपये का ठेका बैंक गारंटी के आधार पर आवंटित किया था। परियोजना पूरी होने के बाद जब संबंधित बैंक गारंटी का दोबारा सत्यापन कराया गया, तब पता चला कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज असली नहीं थे। इसके बाद मामले को गंभीर मानते हुए कंपनी के खिलाफ भोपाल में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
6.57 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार संबंधित कंपनी ने अनुबंध की शर्तों के तहत लगभग 6.57 करोड़ रुपये की कुल आठ बैंक गारंटी जमा कराई थीं। शुरुआती स्तर पर ई-मेल के माध्यम से इनकी पुष्टि मिलने के बाद विभाग ने अनुबंध को प्रभावी मानते हुए परियोजना का कार्य शुरू करा दिया। बाद में मूल दस्तावेजों का संबंधित बैंक शाखाओं से भौतिक सत्यापन कराया गया तो सामने आया कि जिन बैंक गारंटी के आधार पर ठेका मिला था, वे बैंक रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थीं।
गुजरात की कंपनी पर दर्ज हुई एफआईआर
मामले का खुलासा होने के बाद एमपी-यूडीसी की शिकायत पर गुजरात स्थित संबंधित कंपनी के खिलाफ भोपाल के एमपी नगर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी बैंक गारंटी किस स्तर पर तैयार की गई और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच तेज, कंपनी संचालकों की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उपलब्ध मोबाइल नंबर बंद मिले। फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में सरकारी ठेकों में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए बैंक गारंटी सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।










