हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने शुरू की तैयारी
मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से बंद छात्रसंघ चुनाव एक बार फिर शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। जबलपुर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने चुनाव कराने की दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग अब इसी शैक्षणिक सत्र में छात्रसंघ चुनाव कराने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। सरकार का कहना है कि न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएंगी।
करीब नौ साल बाद लौट सकती है छात्र राजनीति
प्रदेश में आखिरी बार छात्रसंघ चुनाव वर्ष 2017 में आयोजित किए गए थे। इसके बाद विभिन्न कारणों से चुनाव लगातार टलते रहे। पहले कानून-व्यवस्था और कैंपस में विवाद की आशंकाओं का हवाला दिया गया, जबकि बाद के वर्षों में कोरोना महामारी के कारण भी चुनाव नहीं हो सके। इस दौरान छात्र संगठन लगातार चुनाव बहाल करने की मांग उठाते रहे। अब यदि चुनाव होते हैं तो करीब नौ साल बाद कॉलेज परिसरों में छात्र राजनीति फिर सक्रिय होती दिखाई देगी।
लाखों विद्यार्थियों की नजर आगामी चुनाव पर
मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। हर वर्ष छात्रसंघ शुल्क लिए जाने के बावजूद चुनाव नहीं होने को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अब संभावित चुनाव को लेकर छात्रों में उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि चुनाव होने से विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा और कैंपस से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया जा सकेगा।
लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर कोर्ट की अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव को विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। अदालत के रुख के बाद सरकार ने भी चुनाव कराने की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। अब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को शासन के आधिकारिक आदेश का इंतजार है। यदि प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है, तो इसी शैक्षणिक सत्र में छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए जा सकते हैं, जिससे प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में एक बार फिर चुनावी माहौल देखने को मिल सकता है।










