ग्वालियर में गूंजा ‘आयो लाल, सबई चयो झूलेलाल’ का जयघोष, भव्य ज्योति यात्रा में उमड़ा सिंधी समाज, धार्मिक झांकियों ने मोहा मन

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ग्वालियर में मंगलवार को भगवान श्री झूलेलाल महोत्सव के समापन अवसर पर भव्य ज्योति यात्राएं निकाली गईं। माधवगंज और दानाओली स्थित झूलेलाल मंदिरों से निकले चल समारोह में पवित्र बहिराणा साहिब की ज्योति, भगवान झूलेलाल की भव्य प्रतिमा और विभिन्न धार्मिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। ढोल, शहनाई और बैंड की धुनों के बीच श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए। पूरे रास्ते ‘जय झूलेलाल’ और ‘आयो लाल, सबई चयो झूलेलाल’ के जयकारे गूंजते रहे।

पवित्र ज्योति के साथ शुरू हुआ भव्य चल समारोह

माधवगंज स्थित झूलेलाल मंदिर से दोपहर करीब तीन बजे ज्योति यात्रा की शुरुआत हुई। इससे पहले पवित्र बहिराणा साहिब की ज्योति की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद यात्रा को रवाना किया गया। बड़ी संख्या में सिंधी समाज के लोग इसमें शामिल हुए। महिलाओं और युवाओं ने भक्ति गीतों पर उत्साह के साथ हिस्सा लिया, जबकि रास्ते में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।

धार्मिक झांकियों ने खींचा लोगों का ध्यान

चल समारोह में संतों के चित्रों के साथ कई आकर्षक धार्मिक झांकियां शामिल थीं। अघोरी झांकी में भगवान महादेव, माता पार्वती और उनके गणों की प्रस्तुति दिखाई गई, जबकि आदिशक्ति की झांकी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। यात्रा में शामिल पवित्र ज्योति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र रही। लोगों ने ज्योति के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

दानाओली से भी निकली भव्य शोभायात्रा

शाम करीब सात बजे दानाओली स्थित झूलेलाल मंदिर से दूसरी शोभायात्रा निकाली गई। इसमें पवित्र ज्योति के साथ भगवान श्री झूलेलाल की आकर्षक प्रतिमा शामिल रही। इटावा से पहुंचे कलाकारों ने अश्व रूप में प्रस्तुति दी, जबकि अलवर से आई ढोल-शहनाई पार्टी ने धार्मिक धुनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। यात्रा में समाज के युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही।

जगह-जगह हुआ स्वागत, जयकारों से गूंजा शहर

चल समारोह के मार्ग में अलग-अलग स्थानों पर सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कई जगह पुष्पवर्षा की गई। ढोल-शहनाई की धुनों पर श्रद्धालु नाचते और झूमते दिखाई दिए। भगवान झूलेलाल के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। महोत्सव के समापन पर निकली इन यात्राओं ने ग्वालियर में सिंधी समाज की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकजुटता की शानदार झलक पेश की।

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