मध्य प्रदेश विशेष सशस्त्र बल (SAF) में बैंड के 650 से अधिक पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में मामला पहुंच गया है। भर्ती में नियमों के पालन और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए दायर याचिका पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने भर्ती से संबंधित पूरा रिकॉर्ड चार सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही फिलहाल भर्ती का परिणाम याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे नियमों के पालन को लेकर सवाल
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि भर्ती के दौरान निर्धारित नियमों के मुताबिक पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए नहीं बुलाया गया। नियमों के अनुसार प्रत्येक पद के लिए तीन उम्मीदवारों को स्किल टेस्ट या इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने की बात कही गई थी। इसी आधार पर 650 से ज्यादा पदों के लिए लगभग 2100 अभ्यर्थियों को मौका मिलना चाहिए था, लेकिन विभाग की ओर से करीब 1200 उम्मीदवारों की सूची जारी की गई।
कटऑफ और चयन सूची को लेकर भी आपत्ति
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया कि विभाग ने अलग-अलग वर्गों के कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए। अभ्यर्थियों का कहना है कि एससी, एसटी और अनारक्षित वर्ग के लिए कितने अंक पर चयन या अगले चरण के लिए बुलावा दिया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुछ उम्मीदवारों के स्किल टेस्ट और वीडियो रिकॉर्डिंग होने के बावजूद उन्हें आगे की प्रक्रिया से बाहर किए जाने का भी दावा किया गया है।
हाईकोर्ट ने भर्ती को अंतिम फैसले से जोड़ा
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मूल दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे होने वाला भर्ती परिणाम याचिका पर आने वाले अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। अब मामले की अगली सुनवाई सितंबर में प्रस्तावित है।
पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर टिकी अगली सुनवाई
याचिकाकर्ताओं की ओर से भर्ती प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराने और चयन से जुड़े मूल रिकॉर्ड कोर्ट में पेश कराने की मांग की गई है। अब विभाग के जवाब और प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान भर्ती प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर कोर्ट का रुख सामने आ सकता है।










