बालाघाट। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंताजनक खबर सामने आई है। जिले के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में एक बाघ शावक मृत अवस्था में मिला है। वन विभाग ने मृत शावक की पहचान चर्चित बाघिन ‘गौरा’ के डेढ़ वर्षीय शावक ‘सूखा’ के रूप में की है। प्रारंभिक जांच में उसके शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं, जिससे अधिकारियों ने आशंका जताई है कि उसकी मौत किसी दूसरे बाघ के साथ हुए संघर्ष के दौरान हुई होगी। हालांकि अंतिम कारण पोस्टमार्टम और विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
गश्त के दौरान मिला शव, कई दिनों पहले हुई थी मौत की आशंका
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार दक्षिण वन मंडल बालाघाट के अंतर्गत बहियाटिकुर सर्किल के कक्ष क्रमांक-443 में नियमित गश्त के दौरान शावक का शव मिला। निरीक्षण में उसके शरीर पर गहरे घाव दिखाई दिए। प्रारंभिक अनुमान है कि उसकी मौत करीब दो दिन पहले हुई थी। सूचना मिलते ही वरिष्ठ वन अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू कर दी गई।
जानकारी के मुताबिक ‘सूखा’ पिछले लगभग दस महीनों से अपनी मां ‘गौरा’ से अलग हो गया था। वन विभाग लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखने और तलाश करने का प्रयास कर रहा था, लेकिन लंबे समय तक उसका कोई पता नहीं चल पाया। विशेषज्ञों का मानना है कि मां से अलग होने के बाद वह पर्याप्त शिकार नहीं कर सका, जिससे वह कमजोर हो गया और संभवतः किसी वयस्क बाघ के साथ संघर्ष में अपनी जान गंवा बैठा।
प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम, रिपोर्ट का इंतजार
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) सहित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। निर्धारित वन्यजीव प्रोटोकॉल के अनुसार क्षेत्र को सुरक्षित किया गया और कान्हा से पहुंचे विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम, राजस्व अधिकारियों तथा स्थानीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बाघ शावक का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद वन विभाग ने नियमानुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी पूरी की। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।
लगातार दूसरी बाघ मौत से संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल
सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में पिछले एक वर्ष के भीतर बाघ की यह दूसरी मौत है। इससे पहले भी एक बाघिन की मौत का मामला चर्चा में रहा था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जंगल प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निगरानी और संरक्षण उपायों को और मजबूत नहीं किया गया, तो इसका असर क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा, जैव विविधता और भविष्य में पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
वन विभाग का कहना है कि मानसून के दौरान रिजर्व क्षेत्र में नियमित गश्त जारी है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।










