भोपाल। मध्य प्रदेश की बिजली व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में राजधानी भोपाल में एक बड़ी परियोजना आकार लेने जा रही है। एयरोसिटी क्षेत्र में करीब 305 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक ग्रिड कंट्रोल सेंटर कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। इस केंद्र के जरिए पश्चिमी क्षेत्र के इंदौर और उज्जैन संभाग से जुड़े करीब 15 जिलों की बिजली ग्रिड व्यवस्था की निगरानी और नियंत्रण किया जा सकेगा। परियोजना को लगभग दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बनने के बाद भोपाल ऊर्जा प्रबंधन और बिजली ग्रिड संचालन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी केंद्र के रूप में उभर सकता है।
ग्रिड संचालन के लिए बनेगा हाईटेक कंट्रोल सेंटर
प्रस्तावित परिसर में आधुनिक तकनीक के माध्यम से बिजली के उत्पादन, आपूर्ति, मांग और ग्रिड की स्थिति पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। डिजिटल सिस्टम के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली की स्थिति की जानकारी वास्तविक समय में प्राप्त करने और जरूरत के अनुसार बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे बिजली व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। स्मार्ट ग्रिड और SCADA जैसी तकनीकों का इस्तेमाल इस तरह के नियंत्रण तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बीडीए और ग्रिड इंडिया मिलकर आगे बढ़ाएंगे परियोजना
इस परियोजना को लेकर भोपाल संभागायुक्त कार्यालय में अधिकारियों की बैठक में निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई। परियोजना के लिए भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) और Grid-India Limited के बीच ‘Concept to Completion’ समझौता हो चुका है और इसके लिए जमीन भी आवंटित की जा चुकी है। निर्माण से पहले टेंडर प्रक्रिया, भवन अनुमति, पर्यावरण संबंधी स्वीकृति, भूमि उपयोग परिवर्तन और ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणन जैसी औपचारिकताओं को पूरा किया जाना है। अधिकारियों को सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने और निर्माण कार्य तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार कराने पर जोर दिया गया है।
15 जिलों की बिजली व्यवस्था को मिलेगा केंद्रीकृत नियंत्रण
नए कंट्रोल सेंटर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इससे पश्चिमी क्षेत्र के 15 जिलों में संचालित बिजली ग्रिड की स्थिति पर एक केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत निगरानी की जा सकेगी। बिजली की मांग बढ़ने, लोड में बदलाव होने या ग्रिड से जुड़ी किसी तकनीकी स्थिति में कंट्रोल सेंटर से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने में आसानी होगी। इससे बिजली आपूर्ति के बेहतर प्रबंधन और संभावित व्यवधानों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।
भोपाल के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
करीब 305 करोड़ रुपये की यह परियोजना सिर्फ एक नए भवन के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश में बिजली प्रबंधन को अधिक तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आधुनिक निगरानी प्रणाली से बिजली के प्रवाह और मांग का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। भविष्य में बिजली की बढ़ती जरूरतों और ग्रिड पर बढ़ते दबाव को संभालने के लिए भी इस तरह की केंद्रीकृत व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। परियोजना पूरी होने के बाद भोपाल को ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी आधुनिक तकनीकी गतिविधियों के लिए एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।










