भोपाल। मध्य प्रदेश में निवेश के नाम पर लोगों से बड़ी रकम जुटाने वाले सागा ग्रुप से जुड़े मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आर्थिक अनियमितताओं का दायरा भी सामने आ रहा है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी जांच के अनुसार प्रदेश में करीब 2.10 लाख लोगों से लगभग 890 करोड़ रुपये निवेश के तौर पर जमा कराए गए थे। इनमें से करीब 492 करोड़ रुपये की राशि अब भी निवेशकों को वापस मिलना बाकी है। मामले के प्रमुख आरोपी समीर अग्रवाल के देश से बाहर होने की जानकारी सामने आने के बाद उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है।
ज्यादा रिटर्न के वादे से जुटाई गई बड़ी रकम
जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक सागा ग्रुप ने वर्ष 2009 के आसपास निवेश योजनाओं के माध्यम से लोगों को आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिलाकर रकम जुटानी शुरू की थी। निवेशकों को निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद कई गुना राशि मिलने का दावा किया गया था। शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को भुगतान भी किया गया, लेकिन बाद में मैच्योरिटी की रकम लौटाने में परेशानी आने लगी। भुगतान नहीं मिलने के बाद अलग-अलग जिलों में निवेशकों ने शिकायतें दर्ज कराईं।
अशोक नगर, टीकमगढ़, दमोह और विदिशा समेत कई स्थानों पर पुलिस ने मामले से संबंधित एफआईआर दर्ज की। मामला कई राज्यों और बड़ी संख्या में निवेशकों से जुड़ा होने के कारण इसकी जांच आगे चलकर सीआईडी को सौंपी गई।
2.10 लाख निवेशकों से 890 करोड़ जमा करने का दावा
सीआईडी की जांच के अनुसार मध्य प्रदेश में सागा ग्रुप से जुड़ी योजनाओं के जरिए लगभग 2 लाख 10 हजार लोगों से करीब 890 करोड़ रुपये जमा किए गए। निवेश की तय अवधि पूरी होने पर इन लोगों को लगभग 2067 करोड़ रुपये वापस मिलने का अनुमान था। हालांकि कंपनी की ओर से भुगतान व्यवस्था बाद में प्रभावित हो गई और बड़ी संख्या में निवेशकों को उनकी रकम नहीं मिल सकी। फिलहाल प्रदेश के निवेशकों की करीब 492 करोड़ रुपये की राशि फंसी होने की जानकारी जांच में सामने आई है।
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि समूह से जुड़े लोगों ने अलग-अलग नामों से कई कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के माध्यम से केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी निवेशकों से रकम जुटाए जाने की बात सामने आई है।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
पुलिस की जांच में सागा ग्रुप से जुड़ी लस्टीनेस जनहित क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि इस संस्था के माध्यम से मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी निवेश के नाम पर लोगों से रकम ली गई। जांच का दायरा बढ़ने के साथ अन्य कंपनियों और राज्यों में भी इसी तरह की गतिविधियों की जानकारी सामने आने की संभावना जताई गई है।
समीर अग्रवाल और समूह से जुड़े अन्य आरोपितों के खिलाफ मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम समेत कई राज्यों में मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। मामले की जांच में केंद्रीय जांच एजेंसियां भी शामिल हैं।
समीर अग्रवाल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की तैयारी
जांच एजेंसियों के अनुसार मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल देश से बाहर जा चुका है। ऐसे में उसे वापस भारत लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस द्वारा अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
मध्य प्रदेश पुलिस ने समीर अग्रवाल के अलावा 16 अन्य संदिग्ध आरोपितों की पहचान की है। इनमें मुंबई, ललितपुर, टीकमगढ़ और झांसी से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच अभी जारी है और अधिकारियों के अनुसार आगे आरोपितों की संख्या बढ़ सकती है।
भोपाल और मुंबई में जांच एजेंसियों की कार्रवाई
मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भी कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार 13 से 16 अगस्त के बीच भोपाल और मुंबई में समूह से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस कार्रवाई में 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति, शेयर, नकदी और आभूषण जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल सीआईडी सहित अन्य जांच एजेंसियां निवेशकों से जुड़ी शिकायतों, कंपनियों के नेटवर्क और रकम के लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। जांच आगे बढ़ने पर निवेशकों की संख्या, फंसी हुई रकम और मामले से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।










